देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ में महिला जवानों के क्वार्टरों को लेकर काफी हलचल देखी जा रही है। ये क्वार्टर दिल्ली के द्वारका इलाके में स्थित बल की एकमात्र महिला बटालियन '88' में बनाए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि क्वार्टर तो बनकर तैयार हैं, लेकिन महिला जवान उनके भीतर नहीं जा सकती। कहा जा रहा है कि बड़े साहब आएंगे, फीता काटेंगे तो ही उन्हें क्वार्टर में एंट्री मिलेगी। महिलाओं को अपना सामान उठाकर इधर-उधर दौड़ना पड़ रहा है। बल के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि कुछ छोटी मोटी कमी रह गई होगी, उसी के चलते क्वार्टर में एंट्री नहीं हो पा रही है। ये बटालियन स्तर का मामला है।
सीआरपीएफ की '88' महिला बटालियन, बल के नॉर्दन सेक्टर में पड़ती है। द्वारका स्थित बल कैंपस में विभिन्न श्रेणियों वाले लगभग दो सौ क्वार्टर बनाए गए हैं। खास बात ये है कि महिला जवानों को उनके क्वार्टर की चाबी दे दी गई है। यानी अलॉटमेंट तो हो गया है, लेकिन महिला जवान जब सामान लेकर वहां पहुंचती हैं तो उन्हें एंट्री नहीं करने दी जाती। वे परेशान हैं। गर्मी में सामान लेकर महिला जवानों को अपने परिचित या किसी सहयोगी के मकान पर जाना पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि महिला जवानों के क्वार्टर बन कर तैयार हैं। महिलाओं को एंट्री इसलिए नहीं मिल रही है, क्योंकि बड़े 'साहब' अभी इनका उद्घाटन करेंगे।
'कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन' के मुख्य संरक्षक एसएस संधू, पूर्व एडीजी सीआरपीएफ (रिटायर्ड) का कहना है कि इस तरह की लापरवाही ठीक नहीं है। महिला जवानों को जब क्वार्टर अलॉट हो चुके हैं तो उन्हें एंट्री दे देनी चाहिए। उद्घाटन तो बाद में भी हो सकता है। अभी तो महिलाओं को हो रही परेशानी देखनी है न कि उद्घाटन। बल के नॉर्दन सेक्टर के आईजी राजेश कुमार का कहना है, ऐसी कोई बात नहीं है। सभी क्वार्टर महिला जवानों के लिए ही बने हैं। बिजली, पानी या कोई दूसरा काम अधूरा रह गया होगा, इसलिए प्रवेश में देरी हो रही है। वैसे ये बटालियन स्तर का काम है। हमारा भी प्रयास है कि महिलाओं को जल्द से जल्द, उनके क्वार्टरों में प्रवेश मिल जाए।