कोरोना संक्रमण से बचने के लिए कई देशों में दूसरी बूस्टर डोज की भी शुरुआत हो गई है। भारत में अभी पहली बूस्टर डोज को मंजूरी मिली है। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने दूसरी बूस्टर डोज को लेकर एक स्टडी रिपोर्ट जारी की है। इसमें दूसरी बूस्टर डोज को युवाओं के लिए असरदार नहीं बताया गया है। आइए जानते हैं कि डब्ल्यूएचओ ने क्या-क्या कहा और कौन लोग दूसरी बूस्टर डोज लगवा सकते हैं?
ये लगवा सकते हैं दूसरी बूस्टर डोज
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक स्टडी का हवाला देते हुए बताया कि दूसरी बूस्टर डोज का फायदा ज्यादा जोखिम वाले लोगों, स्वास्थ्य कर्मियों, 60 साल से अधिक उम्र के लोगों या कम प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों पर देखने को मिल रहा है।
डब्ल्यूएचओ ने टीकाकरण पर विशेषज्ञों के रणनीतिक परामर्श समूह (एसएजीई) के सुझाव भी बताए।
कहा, सामान्य तौर पर टीकों की प्रारंभिक खुराकों के पूरे होने के चार से छह महीने के अंतराल पर पहली बूस्टर खुराक लगाई जा सकती है। विशेष रूप से ओमीक्रोन के संबंध में ऐसा किया जा सकता है। डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा कि जिन लोगों की जान को ज्यादा खतरा है उनको mRNA वैक्सीन की बूस्टर डोज फायदा दिलाएगी।
युवाओं पर दूसरी बूस्टर डोज का कोई खास असर नहीं
डब्ल्यूएचओ ने कुल सात अलग-अलग स्टडी का हवाला दिया। इसमें दूसरी बूस्टर डोज को लेकर पड़ताल की गई है। इसके मुताबिक, एक्सपर्ट को इस बात के सबूत नहीं मिले कि दूसरी बूस्टर डोज का युवाओं पर भी कोई फायदा होगा।