कोवाक्सिन टीके का निर्माण पारंपरिक तरीके से किया गया है। इसमें मृत कोरोना वायरस को शरीर में डाला जाता है, जिससे शरीर इस वायरस की पहचान कर लेता है और उसके खिलाफ एंटीबॉडी तैयार करने लगता है। इस तरह यह टीका कोरोना से सुरक्षा देता है। यह दो खुराक वाला टीका है और इसकी दोनों खुराकों के बीच चार से छह सप्ताह का अंतर रखा जा रहा है।
कितना असरदार है कोवाक्सिन टीका
कोवाक्सिन टीके ने कोरोना वायरस से संक्रमित सिम्टोमैटिक मरीजों (जिनमें लक्षण दिखाई देते हैं) में 77.8 फीसदी असरदार साबित हुई है और गंभीर सिम्टोमैटिक मरीजों में 92.4 फीसदी प्रभावी साबित हुई। वहीं, कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ यह टीका 65.2 फीसदी असरदार दिखा है। कंपनी ने जून में बताया था कि टीके के तीसरे चरण के ट्रायल पूरे हो गए हैं।
इस तरह हुए परीक्षण के तीनों चरण
कोवाक्सिन टीके के पहले चरण के परीक्षण में 375, दूसरे चरण में 380 और तीसरे चरण में 375 मरीजों पर अध्ययन किया गया था। भारत बायोटेक के अनुसार टीके के तीनों ट्रायल सफल रहे थे और हर चरण में हमें ऐसा डाटा मिला जो अगले चरण के परीक्षण के लिए आवश्यक था। कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ इस टीके को 65.2 फीसदी प्रभावी पाया गया है।
कोवाक्सिन की उपयोग अवधि भी बढ़ी
डब्ल्यूएचओ से अनुमति मिलने से कुछ घंटे पहले ही भारत बायोटेक ने बताया था कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने कोवाक्सिन की उपयोग अवधि को निर्माण की तारीख से 12 महीने तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। कंपनी के अनुसार सीडीएससीओ ने अवधि विस्तार की अनुमति अतिरिक्त स्थिरता आंकड़ों की उपलब्धता के आधार पर दी है।
टीकाकरण में दूसरे देश भी कर सकेंगे कोवाक्सिन को शामिल
डब्ल्यूएचओ से मान्यता नहीं मिलने की वजह से अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों ने कोवाक्सिन को अनुमति नहीं दी थी। अब ऐसे लोग सभी देशों की यात्रा कर सकेंगे। इसके अलावा भारतीय वैज्ञानिकों की इस खोज और भारत में ही बन रही कोवाक्सिन को दुनिया का कोई भी देश अपने यहां टीकाकरण में शामिल कर सकता है। कोरोना के खिलाफ कोवाक्सिन 77.8 फीसदी प्रभावशाली दिखी। वहीं, नए डेल्टा संस्करण के खिलाफ 65.2 फीसदी सुरक्षा प्रदान करता है।समूह ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद कोवाक्सिन को दुनियाभर में आपात इस्तेमाल के लिए उपयुक्त पाया है।
चार महीने में ही बना था कोवाक्सिन टीका
पिछले साल मार्च माह में ही कोरोना मरीज के सैंपल से वायरस लेकर उसे आइसोलेट करने और निष्क्रिय करने के बाद उससे कोवाक्सिन टीका बनाया गया था। नई दिल्ली स्थित आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने इसे भारत बायोटेक के हवाले किया और इस साल तीन जनवरी से यह टीका देश के टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल हुआ।
टीके की बढ़ेगी उपलब्धता
डब्ल्यूएचओ में दवाओं तक पहुंच बढ़ाने वाले विभाग की सहायक महानिदेशक डॉ. मेरिंगेला सिमो ने कहा, अधिक से अधिक लोगों तक टीके की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ही कोवाक्सिन के आपात इस्तेमाल को मंजूरी दी गई है।