घटना की जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने बताया अगर उसे जमानत दे दी जाती है तो इससे कानून के बारे में नकारात्मक छवि बन सकती है। इसी के साथ कुछ धार्मिक समूहों के बीच भय, दहशत और असुरक्षा भी पैदा हो सकती है।
इस साल जुलाई में चलती ट्रेन में अपने वरिष्ठ सहकर्मी और तीन यात्रियों पर गोली चलाने वाले रेलवे सुरक्षा बल के बर्खास्त कॉन्स्टेबल चेतनसिंह चौधरी को एक अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया है। आरोपी कॉन्स्टेबल को फिलहाल महाराष्ट्र के अकोला जेल में रखा गया है। वह सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद था।
विज्ञापन
वकील अमित मिश्रा और पंकज घिलदियाल ने आरोपी कॉन्स्टेबल की तरफ से जमानत याजिका दायर की थी। जमानत याचिका में बताया गया कि आरोपी भूतिया दुनिया के भ्रम से जूझ रहा था और इस वजह से वह अजीब हरकतें कर रहा था। पुलिस ने उसकी याचिका का विरोध किया। उन्होंने बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी को किसी समुदाय के प्रति क्रोध और द्वेष था।
पीड़ित की पत्नी ने किया जमानत याचिका का विरोध
इस घटना की जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने बताया अगर उसे जमानत दे दी जाती है तो इससे कानून के बारे में नकारात्मक छवि बन सकती है। इसी के साथ कुछ धार्मिक समूहों के बीच भय, दहशत और असुरक्षा भी पैदा हो सकती है। पीड़ित असगर शेख की पत्नी ने अपने वकील के जरिए आरोपी कॉन्स्टेबल की जमानत याचिका का विरोध किया है। उन्होंने इसे आतंकी मानसिकता वाला व्यक्ति बताया है।
विज्ञापन
यह घटना 31 जुलाई को जयपुर-मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस में घटी। उसने आरपीएफ सहायक उप-निरीक्षक टीका राम मीना और बी5 कोच में एक अन्य यात्री अपने बंदुक से गोली मार दी थी। उसने सुबह 5 बजे के बाद पेंट्री कार में एक यात्री और पेंट्री कार के बगल वाले S6 कोच में एक और यात्री को भी गोली मारी थी। इस घटना के बाद यात्रियों ने ट्रेन रोकने के लिए चेन खींचा। मौके का फायदा उठाते हुए आरोपी भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पकड़ा गया। पुलिस ने अक्तूबर में आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।