दिल्ली में बसों और मेट्रो में सौ फीसदी की क्षमता के साथ सफर को अनुमति तो दे दी गई लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक लोगों ने अगर जरा भी लापरवाही बरती तो हालात संभालने मुश्किल हो जाएंगे। मंत्रालय ने तीसरी लहर से बचने के लिए चार बिंदुओं पर काम करना भी शुरू कर दिया है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी से आने वाली तीसरी लहर को रोका जा सके।
पूरे देश में कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए तैयार की गई समितियों ने सभी राज्यों का आंकलन करना शुरू किया है जहां लॉकडाउन या तो खत्म कर दिया गया है या सबसे ज्यादा ढील दी जा रही है। सूत्रों का कहना है उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों के प्रमुख शहर और देश की राजधानी दिल्ली इसमें शामिल है। हाल में हुए सीरो सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में 80 फीसदी से ज्यादा लोगों में कोरोना के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता बन चुकी है। ऐसे में लॉकडाउन में ढील दी जानी मुनासिब ही है लेकिन इसका नाजायज फायदा उठाना तीसरी लहर को निमंत्रण देने जैसा ही है।
नेशनल कोविड टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. एनके अरोड़ा का कहना है कि दिल्ली में जिस तरीके से मेट्रो और बस में पूरी क्षमता के साथ लोगों को सफर करने की अनुमति दी गई है उस पर अभी बहुत ज्यादा नजर रखने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि जब हम सौ फीसदी क्षमता के साथ बसों या मेट्रो में सफर करने की अनुमति देते हैं तो हमें इस बात का ध्यान रखना होता है कि बस या मेट्रो में बैठने की क्षमता को सीटों की संख्या के मुताबिक ही सौ फीसदी के तौर पर आंका जाता है। जबकि दिल्ली की बसों और मेट्रो में यह संख्या दो से तीन गुनी तक ज्यादा देखी जाती है। डॉ. अरोड़ा का कहना है यही बात बस चिंता की है। वो कहते हैं जब हम मानकों के अनुसार व्यवस्थाएं लागू करेंगे और उसका पूरी तरह से अनुपालन करेंगे तो किसी भी तरीके के खतरे का अंदेशा बहुत कम हो जाता है। लेकिन क्षमता के मुताबिक कहीं भी अधिक भीड़ होना तीसरी लहर को दावत देने जैसा ही है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक उत्तर भारत के उन सभी राज्यों राजधानियों समेत सभी प्रमुख शहरों की मॉनिटरिंग लगातार की जा रही है। स्थानीय प्रशासन से लेकर राज्य सरकारों के स्वास्थ्य विभाग से रोजाना के मिलने वाले इनपुट के आधार पर आगे की योजनाएं तैयार की जा रही हैं। आईसीएमआर और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के वैज्ञानिकों ने तीसरी लहर के मद्देनजर कई बिंदुओं पर काम करना शुरू कर दिया है। आईसीएमआर के वैज्ञानिक डॉ. समीरन पांडा कहते हैं कि हमें अभी सबसे पहले इस बात का पता करना होगा कि वायरस में कोई म्यूटेशन तो नहीं हो रहा है।
इसके बाद देश प्रदेश की राजधानी से लेकर दूरदराज जिलों के मुख्यालय और शहरों तहसील कस्बों में अस्पतालों की स्थितियों का आकलन कर उन को मजबूत करने की दिशा में काम की किया जा रहा है। डॉ. समीरन पांडा कहते हैं उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों के लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से हालात कंट्रोल में है। लेकिन दक्षिण भारत के कुछ राज्यों खासतौर से केरल में जो हालात है वह निश्चित तौर पर चिंता में डालने वाले हैं। डॉ. पांडा का कहना है कि लगातार 40 हजार के करीब मामलों का बीते एक महीने से एक जगह पर बने रहना बहुत अच्छे संकेत के तौर पर नहीं देखा जा सकता है।