देश में जहां कोरोना वायरस के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। वहीं राहत भरी खबर यह है कि देश की आर वैल्यू कम हो रही है। इससे उम्मीद है कि भारत में सक्रिय मामलों में कमी आएगी। पांच सबसे प्रभावित राज्यों में पिछले एक हफ्ते में आर वैल्यू एक से नीचे रही है। लेकिन लाभ का स्थायित्व इन राज्यों में निरंतर प्रगति और बीमारी की रूपरेखा पर निर्भर करता है।
मुंबई, पुणे, चेन्नई, कोलकाता और बंगलूरू जैसे शहरों पर निर्भर करता है कि महामारी कैसे बढ़ती है। चेन्नई के गणितीय विज्ञान संस्थान का कहना है कि 19 सितंबर से शुरू हुए सप्ताह में भारत की आर वैल्यू में मामूली गिरावट 0.9 आई जबकि पिछले हफ्ते यह वैल्यू 1.1 थी। वहीं कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य- महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश की आर वैल्यू 19 से 22 सितंबर के बीच एक से नीचे थी।
संस्थान के शोधकर्ता सीताभरा सिन्हा ने कहा कि अब महाराष्ट्र और कर्नाटक में मामले बढ़ने लगे हैं। उन्होंने कहा, ‘वर्तमान में भारत इसपर निर्भर करता है कि महाराष्ट्र क्या करता है क्योंकि राज्य में सबसे ज्यादा सक्रिय मामले हैं और इसका देश के औसत मामलों में योगदान है। बेशक यह आर के परिमाण पर भी निर्भर करेगा। लेकिन अभी तक महाराष्ट्र भारत के आर मूल्य पर हावी है।’
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आर वैल्यू व्याख्याओं के अधीन है लेकिन बीमारी कितनी तेजी से फैल रही है यह इसका एक उपयोगी उपाय है। सिन्हा कहते हैं कि अगर भारत लंबे समय तक आर वैल्यू को एक से नीचे बनाए रखने में सक्षम रहता है तो महामारी में गिरावट शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय औसत केवल ज्यादा प्रभावित राज्यों से संबंधित नहीं हो सकता है। सरकार को उन राज्यों के कंटेनमेंट उपायों पर ध्यान देना चाहिए जहां ज्यादा सक्रिय मामले नहीं हैं लेकिन आर वैल्यू एक से ज्यादा है।
क्या होती है आर-वैल्यू
जितने लोगों को एक कोरोना पीड़ित व्यक्ति औसतन संक्रमित कर सकता है उसे आर वैल्यू कहते हैं। यानी अगर आर-वैल्यू एक के ऊपर है तो इसका मतलब हुआ कि कोई व्यक्ति एक से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर सकता है। वहीं इसके एक से कम होने का मतलब हुआ कि कोई व्यक्ति कम से कम लोगों को संक्रमित कर सकता है।