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कोरोना : स्वास्थ्य मंत्रालय ने की 700 जिलों की समीक्षा, रेड जोन में राष्ट्रीय राजधानी के छह जिलों सहित आधा एनसीआर

Sat, 23 Apr 2022 06:35 AM IST
योगेश साहू परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

बीते तीन सप्ताह से दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में काफी तेजी से कोरोना संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्थिति यह है कि रोजाना राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले संक्रमित रोगियों में से 40 से 45 फीसदी तक दिल्ली और आसपास के शहरों से संबंधित हैं। दिल्ली सरकार के अनुसार अप्रैल माह में ही दिल्ली से 333 कोरोना संक्रमित मरीज बाहरी राज्यों में जा चुके हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 15 से 21 अप्रैल के बीच जब देश के 700 से भी ज्यादा जिलों की समीक्षा की गई तो पता चला कि दिल्ली से सटे गुरुग्राम और गौतमबुद्ध नगर में साप्ताहिक संक्रमण दर 12 फीसदी से भी अधिक दर्ज की गई है। इसके चलते इन जिलों को अति संवेदनशील माना जा रहा है। वहीं फरीदाबाद में 7.20 फीसदी सैंपल संक्रमित मिले हैं। हालांकि, गाजियाबाद में अभी स्थिति नियंत्रित है। यहां सप्ताह भर के दौरान 2.19 फीसदी सैंपल संक्रमित मिले लेकिन आशंका यह भी है कि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो संक्रमण में उछाल यहां भी दर्ज किया जा सकता है।

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दिल्ली सरकार की रिपोर्ट : जांच कराने के बाद शहर से बाहर चले जा रहे कुछ संक्रमित

बीते 3 हफ्ते से कोरोना मामलों की लगातार बढ़ोतरी से दिल्ली के छह जिले सहित आधा एनसीआर रेड जोन में पहुंच गया है। इसके अलावा संक्रमित मरीज हर दिन लापता भी हो रहे हैं। दिल्ली सरकार की रिपोर्ट बताती है कि रोजाना राजधानी में आकर जांच कराने के बाद जब इनकी रिपोर्ट आती है तो पता चलता है कि मरीज दिल्ली से बाहर चला गया। इसकी वजह से कई मरीज सरकारी निगरानी तंत्र से बाहर हैं। ऐसे में संक्रमण स्रोत की तलाश कर पाना भी काफी मुश्किल है।

दिल्ली और उससे सटे फरीदाबाद, गुरुग्राम और गौतमबुद्ध नगर में सबसे अधिक असर दिखाई दे रहा है। इन नौ जिलों में सप्ताह के दौरान औसतन 15 फीसदी से ज्यादा नमूने संक्रमित मिले हैं। कोविड प्रबंधन के तहत इस स्थिति को रेड जोन में जोड़कर देखा जा रहा है जो गंभीर स्थिति का संकेत है। हालांकि, अस्पतालों में भर्ती रोगियों की संख्या में बड़ा बदलाव भी नहीं दिख रहा।

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दरअसल बीते तीन सप्ताह से दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में काफी तेजी से कोरोना संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्थिति यह है कि रोजाना राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले संक्रमित रोगियों में से 40 से 45 फीसदी तक दिल्ली और आसपास के शहरों से संबंधित हैं।

दिल्ली से रोज लापता हो रहे रोगी
दिल्ली सरकार के अनुसार अप्रैल माह में ही दिल्ली से 333 कोरोना संक्रमित मरीज बाहरी राज्यों में जा चुके हैं। यह सिलसिला बीते 13 मार्च से ही देखने को मिल रहा है। अगर इस माह  एक से 18 अप्रैल की बात करें तो रोगियों की संख्या बढ़ने के साथ ही लापता केस भी बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 18 अप्रैल को 482 लोग कोरोना संक्रमित मिले थे जिनमें 446 मरीज सरकारी ट्रैकिंग सिस्टम में मिले लेकिन बाकी मरीज ट्रैकिंग से बाहर थे।

इसी तरह 16 और 17 अप्रैल को 27-27 रोगी लापता हैं। अभी तक सबसे अधिक 42 मरीज 14 अप्रैल से बाहर हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कई लोग जांच के दौरान जानकारियां गलत दे रहे हैं जिसकी वजह से उनसे संपर्क भी नहीं हो पाता। वहीं कई मरीजों की ट्रैकिंग करने पर पता दूसरे राज्य का मिल रहा है।

दक्षिण दिल्ली में संक्रमण दर सबसे अधिक
दिल्ली के 11 में से छह जिलों की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी की बात करें तो यहां 11 में से छह जिले संवेदनशील हैं। इनमें सबसे ज्यादा दक्षिणी दिल्ली है जहां एक सप्ताह के दौरान 8.75 फीसदी नमूने संक्रमित मिले हैं। इस जिले में सप्ताह भर के दौरान औसतन 76 फीसदी जांच आरटी-पीसीआर से की गई। इसी तरह उत्तर पश्चिम में 7.31, पश्चिमी दिल्ली में 6.80, दक्षिण पश्चिम जिले में 5.85, मध्य दिल्ली में 5.79 और नई दिल्ली जिले में 5.12 फीसदी संक्रमण दर रही।

यूपी के इन दो जिलों पर पड़ेगा दिल्ली का असर
जानकारी मिली है कि पूर्वी दिल्ली, शाहदरा और उत्तर पूर्वी दिल्ली जिला प्रशासन को आरटी पीसीआर जांच बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। चूंकि ये तीनों जिले उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्घ नगर और गाजियाबाद से सटे हैं इसलिए यहां आरटी पीसीआर जांच बढ़ाने का आदेश दिया गया है ताकि संक्रमण स्त्रोत के लापता होने की आशंका को कम किया जा सके।

इन जिलों में आरटी पीसीआर जांच कम
समीक्षा की तीसरी सूची में दिल्ली के पांच जिले शामिल हैं। यहां संक्रमण दर पांच फीसदी से कम है लेकिन प्रशासन को तत्काल सख्ती बरतने के लिए कहा जा रहा है। इन जिलों में रोजाना होने वाली आरटी-पीसीआर जांच भी कम हैं। इनमें यमुनापार पूर्वी दिल्ली में 4.76 फीसदी संक्रमण दर है। यहां बीते एक सप्ताह में 66 फीसदी जांच एंटीजन किट्स के जरिये हुई हैं। जबकि नियम 50 फीसदी से भी अधिक जांच आरटी-पीसीआर से होने का है। इसी तरह शाहदरा में 2.39 फीसदी संक्रमण दर है लेकिन यहां 57 फीसदी जांच एंटीजन किट्स के जरिये हुईं।

कोरोना के 1042 नए केस मिले, दो की मौत
राजधानी में कोरोना के केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि बीते एक दिन में कोरोना के 1042 नए केस मिले हैं। वहीं, पांच दिन बाद दो मरीजों की मौत हो गई। इससे पहले बुधवार को एक हजार से अधिक लोग संक्रमित मिले थे। पिछले एक दिन में दो मरीजों की मौत हुई। इससे पहले 16 अप्रैल को एक दिन में दो मौत दर्ज की गई थीं। हालांकि राहत की बात है कि पिछले एक दिन में 757 मरीजों को छुट्टी मिली है। संक्रमण दर भी करीब 5 फीसदी के पास पहुंच गई है।

विभाग के अनुसार राजधानी में हर दिन संक्रमित रोगियों की संख्या बढ़ने की वजह से सक्रिय मामले भी अब तीन हजार पार हुए। कुल 3253 सक्रिय मरीजों में से 2173 अपने घरों में उपचाराधीन हैं। जबकि अस्पतालों में 94 मरीज भर्ती हैं। जानकारी मिली है कि अस्पतालों में भर्ती 26 संदिग्ध कोरोना मरीजों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। इनके अलावा वेंटिलेटर पर मौजूद दो मरीजों की हालत सबसे अधिक गंभीर बताई जा रही है।
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अब तक 3.30 करोड़ से अधिक टीकाकरण
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी बताया कि दिल्ली में अब तक 3.30 करोड़ से अधिक टीकाकरण पूरा हुआ है। इसके अलावा 5.95 करोड़ लोग अब तक एहतियाती खुराक भी हासिल कर चुके हैं।

विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए मास्क और तापमान जांच जरूरी
दिल्ली में कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों के मद्दनेजर शिक्षा निदेशालय ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है, जिसका सभी स्कूल प्रमुखों व संचालकों को पालन करना होगा। एसओपी के दिशा-निर्देशों के अनुसार शिक्षक प्रतिदिन विद्यार्थियों से उनके व उनके परिवार के सदस्यों में कोविड से संबंधित लक्षणों के विषय में पूछेंगे। ताकि यह पता चल सके कि कोई कोरोना संक्रमित तो नहीं है।

संक्रमण का मामला मिलने पर उससे बचाव के लिए कदम उठाया जाएगा। एसओपी में कहा गया है कि स्कूल के प्रवेश गेट पर अनिवार्य रूप से थर्मल स्कैनिंग करनी होगी। बच्चों को मास्क पहनना जरूरी होगा और स्कूलों में एक क्वांरटीन रूम की व्यवस्था भी करनी होगी। स्कूल प्रमुख को स्कूल मैनेजमेेंट कमेटी व पीटीए सदस्यों के साथ बैठक  करनी होगी।
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