कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में बढ़ते प्रकोप के मध्य पोषण ट्रैकर प्रभावित माताओं और बच्चों के लिए सहयोगी साबित हुआ है। अपनी शुरुआत के 90 दिन के भीतर की पोषण ट्रैकर ने प्रभावित माताओं और शिशुओं के स्वास्थ की दृष्टि से दी जाने वाले पोषण संबंधी परिणामों की रियल टाइम निगरानी करने में सफलता हासिल की है। इसकी मदद से सरकार पोषण के लक्ष्य को हासिल करने और कुपोषण से निपटने के लिए सफलता पूर्वक काम कर रही है।
पोषण ट्रैकर एक मजबूत डिजीटल प्लेटफार्म होने के साथ सूचना प्रबंधन प्रणाली है। इसकी मदद से पोषण अभियान को महामारी के बढ़ते संक्रमण के बावजूद जरूरतमंदों तक पहुंचाया जा रहा है। हालांकि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने ट्रैकर की सफलता को सांझा करते हुए कहा था कि अपनी शुरुआत के तीन माह में ही ट्रैकर ने पोषण अभियान की निगरानी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस अवधि में आकड़ों के मुताबिक पोषण ट्रैकर की मदद से देश 1.24 करोड़ से अधिक लोगों को घर में उपलब्ध कराए गए राशन की निगरानी की गई।
इतना ही नहीं अपने लांच होने के महज तीन माह के भीतर ट्रैकर की पहुंच 14.05 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तक हो गई है। 7.08 करोड़ अधिक माता और बच्चों यानी लाभार्थी इसके दायरे में आ गए हैं। इतना ही नहीं 68.79 लाख गर्म पका हुआ भोजन भी इसके माध्यम से ट्रैक किया गया। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मार्च में पोषण ट्रैकर की शुरुआत की थी। इसमें प्ले स्टोर की मदद से एप को डाउनलोड करके आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से इसे संचालित किया जाता है।
पोषण ट्रैकर पोषण वितरण सेवाओं में मजबूती लाने और दिए जा रहे खाद्यन्नों के वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए लांच किया गया था। इसके अलावा इसकी मदद से आंगनबाड़ी केंद्रों की गतिविधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा दी जा रही सर्विसेस का आकलन करना, गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को स्तनपान करा रही माताओं तथा उनके छोटे बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ देना है।
यह आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को वास्तविक समय में पोषण संकेतकों के वितरण के साथ उनकी निगरानी में सक्षम बनाता है। इसमें आगनंबाड़ी कार्यकर्ता लाभार्थियों के डाटा को प्रपत्रों में दर्ज करने के साथ इसके तहत दिए गए मानकों में भरते हैं, जोकि सीधे हेड ऑफिस से जुड़ा होने के कारण रियल टाइम में वितरित किए जा रहे भोजन और खाद्यान्न की निगरानी में सक्षम बनाता है। 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के झुंझुनू में पोषण अभियान की शुरुआत की थी। इसका लक्ष्य 2022 तक देश से कुपोषण को समाप्त करना है। इसके लिए विभिन्न मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं।
पोषण ट्रैकर को केंद्रीकृत डाटा का उपयोग करके तैयार किया गया है। यह अन्य मंत्रालयों और पोषण कार्यक्रमों के साथ सांमजस्य करके काम करता है। इसमें हर लाभार्थी को एक डिजीटल कार्ड की मदद से डिजीटल पहचान दी जाती है। जो कि टेक्नॉलजी की मदद से कॉल सेंटर से जुड़ी रहती है, जहां आगंनबाड़ी कार्यकर्ता के एप में सूचना भरते ही यह सीधे संपूर्ण जानकारी को सार्वजनिक कर देता है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पोषण ट्रैकर ने पूरे अभियान में पारदर्शिता के साथ जवाबदेही को भी बढ़ाने में सफलता हासिल की है।