कोरोना महामारी ने स्वास्थ सेवा पर डाला बड़ा असर
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के पास मौजूद आंकड़ों से जो हकीकत सामने आई है वह चौंकाने वाली है। हर साल लाखों की तादाद में मरीज आपात स्थिति में अस्पताल पहुंच रहे थे लेकिन कोविड के चलते अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के बीच 38 फीसदी मरीज ही पहुंच पाए।
यानी 62 प्रतिशत मरीज अस्पताल कम आए लेकिन इस दौरान मौतें 39 फीसदी तक बढ़ गई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर चंद्रकांत लहारया का कहना है की महामारी के बोझ से स्वास्थ्य व्यवस्था किस तरह फेल हुई है यह पूरा देश देख चुका है।
सरकारी रिकॉर्ड में भले ही कुछ भी लिखा जाए लेकिन सच यही है कि हम अभी भी काफी हद तक नई चुनौतियों से लड़ने के लिए तैयार नहीं है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार अप्रैल 2020 से मई 2021 के बीच ग्रामीण और शहरी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में तीन करोड़ 3,69,99,209 मरीजों को भर्ती किया गया, जो कि 2019 की तुलना में 38 फीसदी है। अप्रैल 2020 से मई 2021 के बीच 2,07,795 की मौत हुई है जो 2019 की तुलना में 39 फीसदी अधिक है।
ऐसे बदले हालात
इमरजेंसी चिकित्सकीय सेवा के तहत ट्रामा, प्रसूति, हार्ट अटैक के मामले भी पिछले साल की तुलना में इस बार काफी कम हुए हैं। साल 2020-21 के दौरान ट्रामा से जुड़े 38.2 लाख मरीज भर्ती किए गए। जो कि 2019 की तुलना में 22 फीसदी कम है।
इनके अलावा बर्न 26, प्रसूति 10, सांप के काटने 8, कार्डिएट 26 और मस्तिक से जुड़ी धमनियों में ब्लॉकेज इत्यादि के मामलों ने 27 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।