सुप्रीम कोर्ट ने लोन खातों को एनपीए घोषित करने के मामले में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर और अन्य बैंकों के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिकाओं को खारिज कर दिया। साथ ही कहा, कोरोना की दूसरी लहर के बाद से देश की अर्थव्यवस्था में काफी तेजी आई है।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि अवमानना अदालत और अवमानना करने वाले के बीच का मामला है और वह वरिष्ठ बैंक अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई करने की इच्छुक नहीं है। क्योंकि यह न्याय के हित में नहीं है।
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को सरफेसी कानून 2002 के तहत इसका निदान कराने की आजादी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील विशाल तिवारी ने कहा कि खातों को 31 अगस्त, 2020 तक और फिर अगले आदेश तक एनपीए घोषित नहीं करने की सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बैंकों ने खातों को एकतरफा एनपीए घोषित कर दिया।