असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने रविवार को कहा कि अगर कांग्रेस द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन की सनातन धर्म पर विवादास्पद टिप्पणी से दूरी नहीं बनाती है, तो यह जनता की इस धारणा की पुष्टि करेगा कि पार्टी 'हिंदू विरोधी' है।
उन्होंने द्रमुक नेता के बयानों का बचाव करने के लिए कार्ति चिदंबरम को लेकर कांग्रेस के रुख पर भी सवाल उठाया। सरमा ने कहा, 'मैं तमिलनाडु के मंत्री के बयान की निंदा नहीं करना चाहता, क्योंकि उन्होंने खुद को बेनकाब कर दिया है।' उन्होंने दावा किया कि इसी तरह की टिप्पणी कार्ति चिदंबरम और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी की थी।
द्रमुक की युवा शाखा के सचिव और तमिलनाडु के युवा कल्याण मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने शनिवार को आरोप लगाया था कि सनातन धर्म समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। उन्होंने इसकी तुलना कोरोना वायरस, मलेरिया, डेंगू वायरस और मच्छरों से होने वाले बुखार से की थी।
उनकी टिप्पणी से सोशल मीडिया पर हंगामा मचा हुआ है। भाजपा के आईटी विभाग के प्रभारी अमित मालवीय ने कहा कि द्रमुक नेता ने सनातन धर्म का पालन करने वाली 80 फीसदी आबादी के 'नरसंहार' का आह्वान किया है। हालांकि, उदयनिधि ने नरसंहार के दावे को खारिज करते हुए कहा कि उनका भाषण सामाजिक बुराइयों की ओर इशारा करता है।
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने स्टालिन की टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा कि भाजपा द्वारा इसकी तुलना 'नरसंहार की मांग' करना इसे 'शरारतपूर्ण मोड़' देने जैसा है। सरमा ने कहा कि अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस द्रमुक के साथ गठबंधन में रहेगी और कार्ति चिदंबरम के खिलाफ कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा, यह राहुल गांधी के लिए परीक्षा है। उन्हें फैसला करना है कि वह सनातन धर्म का सम्मान करते हैं या नहीं।
सरमा ने कहा, 'अगर राहुल गांधी द्रमुक से संबंध नहीं तोड़ते हैं या चिदंबरम को निष्कासित नहीं करते हैं तो यह पुष्टि हो जाएगी कि ये लोग (कांग्रेस) हिंदू विरोधी हैं, वे सनातन धर्म को पसंद नहीं करते हैं, वे हिंदू धर्म को पसंद नहीं करते हैं।' हिंदू धर्म को धर्म मानने पर कोई बयान देने से परहेज करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं उस बहस में नहीं जाना चाहता। यह पांच हजार साल पहले से यहां था और तब तक रहेगा जब तक सूर्य और चंद्रमा हैं।'