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कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों को याद आए राम और शिव!: गहलोत पहुंचे भोले की शरण में, तो बघेल करवा रहे रामायण पाठ

राहुल संपाल
Updated Wed, 17 May 2023 04:53 PM IST

सार

विधानसभा चुनावों को नजदीक देखते हुए राजस्थान और छत्तीसगढ़ के सीएम-मंत्रियों और विधायकों का भगवान पर भरोसा बढ़ गया है। कोई भगवान की शरण में जाकर पूजा हवन करते हुए नजर आ रहा है। तो कोई भगवान राम को प्रदेश का भांजा बता कर भव्य रामायण महोत्सव के साथ सामूहिक हनुमान चालीसा के पाठ कराने में जुटा हुआ है...
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Rajasthan CM Ashok Gehlot - फोटो : Amar Ujala

कर्नाटक चुनाव में बजरंग बली का मुद्दा छाने के बाद अब राजस्थान और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकारों ने भी भगवान शिव और श्रीराम का सहारा लेना शुरू कर दिया है। राजस्थान में सचिन पायलट के साथ तनातनी के बीच सीएम अशोक गहलोत भी शिव की शरण में पहुंच गए हैं। जबकि दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल जून में राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन करने जा रहे हैं।

विधानसभा चुनावों को नजदीक देखते हुए राजस्थान और छत्तीसगढ़ के सीएम-मंत्रियों और विधायकों का भगवान पर भरोसा बढ़ गया है। कोई भगवान की शरण में जाकर पूजा हवन करते हुए नजर आ रहा है। तो कोई भगवान राम को प्रदेश का भांजा बता कर भव्य रामायण महोत्सव के साथ सामूहिक हनुमान चालीसा के पाठ कराने में जुटा हुआ है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत 19 मंत्री यानी आधी सरकार कथा, भोलेनाथ और भगवती पूजन में लीन हैं। सीएम छह माह में दो अनुष्ठान करवा चुके हैं। इसी अवधि में सरकार के 19 मंत्रियों ने करीब 98 धार्मिक कार्यक्रम करवाए या उनमें भाग लिया।

इनमें सात मंत्री और नेता ऐसे हैं, जिन्होंने अपने निवास या निकट के मंदिर आदि जगहों पर भागवत कथा करवाई। भोलेनाथ और भगवती के दर पर हर दूसरा मंत्री फेरी देता दिखाई दे रहा है। सीएम गहलोत 14 फरवरी को बारां के बड़ा का बालाजी में भागवत कथा में बैठे। जबकि 18 फरवरी को सपत्नीक सीएम आवास पर भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की। हाल ही रामनवमी के अवसर पर सीएम हाउस में हवन का आयोजन भी किया था। इसमें सीएम अपने पूरे परिवार के साथ शामिल हुए थे। जबकि सीएम के विरोधी सचिन पायलट 15 मई को जन संघर्ष यात्रा समाप्त कर झाड़खंड महादेव में पूजा करने पहुंचे। वे पिछले आंदोलन पर भी महादेव के दर पर पहुंचे थे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने फरवरी में सालासर बालाजी गौशाला में नंदी पूजन किया था। गायों को हरा चारा खिलाया। इसके अलावा आए दिन मंदिरों में दर्शन करते हुए नजर आ रहे हैं।

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Rajasthan CM Ashok Gehlot - फोटो : Amar Ujala

कर्नाटक चुनाव में बजरंग बली का मुद्दा छाने के बाद अब राजस्थान और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकारों ने भी भगवान शिव और श्रीराम का सहारा लेना शुरू कर दिया है। राजस्थान में सचिन पायलट के साथ तनातनी के बीच सीएम अशोक गहलोत भी शिव की शरण में पहुंच गए हैं। जबकि दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल जून में राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन करने जा रहे हैं।

विधानसभा चुनावों को नजदीक देखते हुए राजस्थान और छत्तीसगढ़ के सीएम-मंत्रियों और विधायकों का भगवान पर भरोसा बढ़ गया है। कोई भगवान की शरण में जाकर पूजा हवन करते हुए नजर आ रहा है। तो कोई भगवान राम को प्रदेश का भांजा बता कर भव्य रामायण महोत्सव के साथ सामूहिक हनुमान चालीसा के पाठ कराने में जुटा हुआ है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत 19 मंत्री यानी आधी सरकार कथा, भोलेनाथ और भगवती पूजन में लीन हैं। सीएम छह माह में दो अनुष्ठान करवा चुके हैं। इसी अवधि में सरकार के 19 मंत्रियों ने करीब 98 धार्मिक कार्यक्रम करवाए या उनमें भाग लिया।

इनमें सात मंत्री और नेता ऐसे हैं, जिन्होंने अपने निवास या निकट के मंदिर आदि जगहों पर भागवत कथा करवाई। भोलेनाथ और भगवती के दर पर हर दूसरा मंत्री फेरी देता दिखाई दे रहा है। सीएम गहलोत 14 फरवरी को बारां के बड़ा का बालाजी में भागवत कथा में बैठे। जबकि 18 फरवरी को सपत्नीक सीएम आवास पर भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की। हाल ही रामनवमी के अवसर पर सीएम हाउस में हवन का आयोजन भी किया था। इसमें सीएम अपने पूरे परिवार के साथ शामिल हुए थे। जबकि सीएम के विरोधी सचिन पायलट 15 मई को जन संघर्ष यात्रा समाप्त कर झाड़खंड महादेव में पूजा करने पहुंचे। वे पिछले आंदोलन पर भी महादेव के दर पर पहुंचे थे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने फरवरी में सालासर बालाजी गौशाला में नंदी पूजन किया था। गायों को हरा चारा खिलाया। इसके अलावा आए दिन मंदिरों में दर्शन करते हुए नजर आ रहे हैं।

Chhattisgarh CM Bhupesh Baghel - फोटो : Amar Ujala
जय सिया राम...बोल सीएम बघेल सभी को दे रहे न्योता

इधर, छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव की तर्ज पर रायगढ़ में 01 जून से 03 जून तक तीन दिवसीय राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। संस्कृति विभाग द्वारा इस आयोजन जोर-शोर से तैयारियां की जा रही हैं। इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों के कलाकारों सहित विदेशी कलाकारों को आमंत्रित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के बारे में प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक वीडियो संदेश में कहा, हमारी धरती माता कौशल्या की धरती है। भगवान राम को यहां भांजा माना जाता है। रायगढ़ के राम लीला मैदान में रामायण महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में प्रदेश के साथ देश के अन्य राज्यों के साथ ही विदेशी दल भी आएंगे। इस आयोजन में रामायण के प्रसंगों की सुंदर व्याख्या होगी। इस महोत्सव में राम कथा का व्यापक विस्तार होगा, जब हम दूरदर्शन पर टीवी में रामायण देखते थे तो मन की प्यास रामकथा सुनकर बुझती थी। आप सभी जरूर पधारें जय सिया राम।

जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में सामूहिक हनुमान चालीसा एवं भव्य केलो आरती का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें हजारों की संख्या में दीपदान किया जाएगा। इस महोत्सव में शामिल होने वाली मानस मंडलियों के पुरस्कृत किया जाएगा। जिसमें प्रथम पुरस्कार 5 लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार 3 लाख रुपये और तृतीय पुरस्कार की राशि 2 लाख रुपये तय की गई है।

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