अपने संबोधन के दौरान सीजेआई ने उपराज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराज की उस अपील का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि महिलाओं को कानून की पढ़ाई के लिए बड़ी संख्या में आगे आना चाहिए और अधिक महिला जजों की भी मांग करनी चाहिए।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) यूयू ललित ने कहा कि निकट भविष्य में न्यायपालिका की शोभा बढ़ाने वाली महिलाओं की संख्या में वृद्धि होगी। सीजेआई ने ये बात शनिवार को डॉ. बी.आर.अंबेडकर राजकीय विधि महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह के समापन समारोह के दौरान कही।
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अपने संबोधन के दौरान उन्होंने उपराज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराज की उस अपील का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि महिलाओं को कानून की पढ़ाई के लिए बड़ी संख्या में आगे आना चाहिए और अधिक महिला जजों की भी मांग करनी चाहिए।
सीजेआई ने कहा कि उड़ीसा, झारखंड, राजस्थान और तमिलनाडु सहित पांच राज्यों में पहले से ही न्यायपालिका में इंडक्शन लेवल पर महिलाओं की संख्या अधिक है। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इंडक्शन-लेवल पर राजस्थान में 180 जजों में से 129 महिला जज हैं और ओडिशा व झारखंड में यह संख्या बहुत बड़ी है।
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उन्होंने सुझाव दिया कि लॉ कॉलेजों में 'अधिनिर्णय' का विषय शामिल किया जाना चाहिए जो संस्थानों से बाहर निकलने वाले युवा वकीलों को उनकी प्रतिभा का पोषण करने में मदद करेगा। 'अधिनिर्णय' के विषय को कुछ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में शामिल गया है।
इस अवसर पर सीजेआई यूयू ललित ने स्मारिका का विमोचन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री एन. रंगसामी ने कहा कि क्षेत्रीय प्रशासन पेरिया कलापेट में लॉ कॉलेज के पास एक लॉ यूनिवर्सिटी स्थापित करने की पहल पर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री रंगसामी भी इस कॉलेज के पूर्व छात्र रहे हैं।