एन वी रमण, मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट
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सीजेआई एनवी रमण का कहना है कि एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जीवंत न्यायपालिका जरूरी है। लोकतंत्र की गुणवत्ता न्याय की गुणवत्ता पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी ने कुछ गहरी समस्याओं को उजागर किया है। वह केंद्र सरकार को न्यायपालिका में रिक्त पदों को भरने के लिए धन्यवाद देते हैं। इन नियुक्तियों की वजह से लंबित मुकदमों का बोझ कुछ कम होगा।
जस्टिस रमण 'पैन इंडिया लीगल अवेयरनेस एंड आउटरीच कैंपेन' के शुभारंभ के मौके पर कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जीवंत न्यायपालिका बेहद जरूरी है। मई के बाद हमने उच्च न्यायालयों में 106 से अधिक जजों की नियुक्ति की सिफारिश की है। सरकार को धन्यवाद देते हैं, क्योंकि उसने कुछ सिफारिशों को मंजूरी दे दी है।
जस्टिस रमण ने कहा कि देश के लोगों को यह महसूस करना चाहिए कि कानून और संस्थान सभी के लिए हैं। लोगों का विश्वास लोकतांत्रिक देश के संस्थानों को मजबूत करता है। लोकतंत्र की गुणवत्ता न्याय की गुणवत्ता पर आश्रित है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) का लक्ष्य होना चाहिए कि जरूरतमंद हम तक नहीं पहुंच सकें तो वह जरूरतमंदों तक पहुंचे।
निर्धन लोगों को उचित मूल्य पर मिले सेवाएं: राष्ट्रपति
कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने की। गांधीजी की 152 वीं जयंती के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में कोविंद ने वकीलों से आग्रह किया कि वे कुछ वक्त निकालें और गरीबों को कानूनी सेवा प्रदान करें। राष्ट्रपिता द्वारा दक्षिण अफ्रीका में की गई सेवा का जिक्र करते हुए उन्होंने यह आग्रह किया। राष्ट्रपति कोविंद ने गांधीजी के बयान को याद करते हुए कहा कि वह कहते थे कि निर्धनतम व्यक्ति को श्रेष्ठतम कानूनी सेवाएं उचित शुल्क पर उपलब्ध होना चाहिए।
लोगों के द्वार तक न्याय पहुंचाने की पहल सराहनीय: रिजिजू
केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने लोगों के द्वार तक न्याय प्रदान करने में अनुकरणीय भूमिका निभाने के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की सराहना की। कार्यक्रम में जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट के कई जज और बार एसोसिएशन के सदस्य मौजूद थे।