भारत के प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण ने उदारीकरण के बाद सामाजिक कार्यों में छात्रों की गतिविधियों में कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, पिछले कुछ दशकों में छात्र समुदाय से कोई बड़ा नेता सामने नहीं आया है।
राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह में बृहस्पतिवार को सीजेआई ने कहा, भारतीय समाज को बारीकी से देखने वाले पर्यवेक्षक ने पाया होगा कि पिछले कुछ दशकों में छात्र समुदाय से कोई बड़ा नेता नहीं उभरा है।
उदारीकरण के बाद सामाजिक कार्यों में छात्रों की घटती भागीदारी देखी जा सकती है। छात्र आत्म केंद्रित नहीं रह सकते और यह आवश्यक है कि अधिक से अधिक अच्छे, दूरदर्शी व ईमानदार छात्र सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करें।
आपको नेताओं के रूप में उभरना चाहिए। राजनीतिक चेतना और सुविचारित बहसें देश को हमारे संविधान द्वारा परिकल्पित गौरवशाली भविष्य की ओर ले जा सकती हैं। एक उत्तरदायी युवा लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है। छात्र समाज का अभिन्न अंग हैं और वे अलगाव में नहीं रह सकते हैं।- जस्टिस एनवी रमण
मानविकी, प्राकृतिक विज्ञान जैसे अहम विषयों की उपेक्षा
सीजेआई रमण ने कहा, आजकल मानविकी और प्राकृतिक विज्ञान जैसे अहम विषयों की उपेक्षा की जा रही है। छात्र व्यावसायिक पाठ्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। उन्होंने कहा, नवोदित प्रतिभाओं के प्रारंभिक वर्षों को एक घुटन भरे माहौल में बिताया जाता है जो दुर्भाग्य से जेलों जैसा है।