भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमण ने कानून जगत में महिला प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए अन्य क्षेत्रों की तरह उन्हें आरक्षण देने की पुरजोर पैरवी की है। उनका कहना है कि यह पेशा अब भी पुरुष प्रधान है और न्यायपालिका में महिलाओं को कम से कम 50 फीसदी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए लेकिन फिलहाल हम इससे काफी दूर हैं।
उन्होंने कहा, महिलाओं को आरक्षण देने के प्रावधान से जिला स्तर पर महिला न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति में उत्साहजनक नतीजे मिले हैं और आंकड़े इस बात को साबित करते हैं। लिहाजा, मेरा दृढ़ता से मानना कि महिलाओं को आरक्षण देने की नीति को सभी स्तरों पर, सभी राज्यों में दोहराने की आवश्यकता है।
बृहस्पतिवार को पहले अंतराष्ट्रीय महिला न्यायाधीश दिवस के उपलक्ष्य में सुप्रीम कोर्ट में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीजेआई बोले, मैं सभी हितधारकों से एक समान व समावेशी भविष्य बनाने की प्रतिज्ञा लेने का आग्रह करता हूं, जहां लैंगिक आधार किसी के सपने पूरा करने में बाधा न बने।
हमारे संविधान में बराबरी का जो वादा किया गया है, उसे देश में सभी महिलाओं के लिए वास्तविक समानता में तब्दील करना चाहिए। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में चार महिला जजों की मौजूदगी की सराहना करते हुए रमण ने बताया, उनकी यह संख्या शीर्ष अदालत में अब तक सर्वाधिक है, वह दिन दूर नहीं, जब देश प्रथम महिला प्रधान न्यायाधीश का गवाह बनेगा। ब्यूरो
हाईकोर्टों के लिए 37 महिला जजों की अनुशंसा
सीजेआई एनवी रमण बोले, न्याय व्यवस्था में मौजूदा असंतुलन सुधारने की कोशिश कर रहा हूं। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्टों के लिए 192 जजों की अनुशंसा की है, जिनमें से 37 यानी 19 फीसदी महिलाएं हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश इनमें से 17 महिलाओं की ही उच्च अदालतों में नियुक्ति हुई है और शेष लंबित हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि भारत में पंजीकृत लगभग 17 लाख अधिवक्ताओं में से केवल 15 फीसदी ही महिलाएं हैं।
महिलाओं एकजुट हो जाओ
- शीर्ष अदालत की चारों महिला जजों - जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस हिमा कोहली, जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस बेला त्रिवेदी की मौजूदगी में कार्ल मार्क्स का कथन उद्धृत करते हुए सीजेआई ने कहा, दुनिया की महिलाओ एकजुट हो जाओ, आपके पास जंजीरों के अलावा खोने के लिए कुछ भी नहीं है।
- सीजेआई रमण ने कहा, मेरे उस आह्वान को क्रांति के लिए उकसाने वाला माना गया था। लेकिन अगर महिलाओं को उनका उचित हिस्सा देना क्रांति है तो मुझे एक क्रांतिकारी के रूप में पेश किए जाने पर खुशी होगी और इसका मैं तहे दिल से स्वागत करता हूं। सीजेआई ने 10 मार्च को अंतराष्ट्रीय महिला न्यायाधीश दिवस के रूप में मान्यता देने को महत्वपूर्ण कदम करार दिया।