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CJI: सीजेआई चंद्रचूड़ का नए आपराधिक कानूनों पर टिप्पणी करने से इनकार, कहा- अदालतों में विचाराधीन हैं ये मुद्दे

Tue, 02 Jul 2024 11:02 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत के प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने तीन नए आपराधिक कानूनों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ये मुद्दे उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं, इसलिए अभी इन पर टिप्पणी नहीं की जा सकती।
 
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cji chandrachud - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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तीन नए आपराधिक कानूनों को लेकर जारी बहस के बीच भारत के प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने मंगलवार को इन पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ये मुद्दे उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं। तीन नए कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) एक जुलाई से पूरे देश में लागू हो गए और इन कानूनों ने भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान लिया।

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नए आपराधिक कानूनों पर टिप्पणी से इनकार
हाल ही में नए कानूनों पर रोक लगाने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इसमें इन कानूनों में कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। दिल्ली में निचली अदालत की नई इमारतों के लिए कड़कड़डूमा, शास्त्री पार्क और रोहिणी में शिलान्यास समारोह के बाद मीडिया से बातचीत में प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘ये मुद्दे उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन हैं, हो सकता है कि अन्य उच्च न्यायालयों में भी लंबित हों। इसलिए मुझे ऐसे मुद्दों पर नहीं बोलना चाहिए, जिनके अदालत के समक्ष आने की संभावना हो।’


आज हमने तीन अदालतों की आधारशिला रखी
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को दिल्ली के शास्त्री पार्क और रोहिणी सेक्टर 26 में अदालत परिसरों की आधारशिला रखी। बता दें, दिल्ली सरकार ने मार्च में पेश किए गए अपने बजट में तीन अदालतों की भवन की योजना को शामिल किया था। कोर्ट के नए भवन में कई तरह की सुविधा होंगी। इस अवसर पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, 'आज हमने तीन अदालतों की आधारशिला रखी है। यह आधारशिला समारोह दिल्ली के नागरिकों और अन्य लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो न्याय की तलाश में यहां आएंगे। ये पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ इमारतें हैं, जो न्यायाधीशों, वकीलों और सभी वादियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं प्रदान करेंगी। मुझे उम्मीद है कि यह परियोजना तय समय पर पूरी हो जाएगी, ताकि सभी वादियों को बहुत जरूरी सुविधाएं मिल सकें। सबसे बढ़कर, हमें वादियों को ध्यान में रखना होगा और उनके हितों की सेवा करनी होगी।'
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1993 में कड़कड़डूमा न्यायालय की स्थापना
इस दौरान सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायालय न्याय और कानून के शासन के गुणों को समझने के लिए बनाए गए हैं। जब हम अपने न्यायाधीशों, वकीलों और वादियों की सुरक्षा, पहुंच और आराम में निवेश करते हैं, तो हम एक न्यायपूर्ण और समावेशी प्रणाली बनाते हैं। उन्होंने कहा कि 1993 में कड़कड़डूमा न्यायालय की स्थापना के बाद से, कई विस्तार परियोजनाएं और अतिरिक्त परिसरों का निर्माण कार्य को पूरा किया गया है। नए न्यायालय परिसर न्यायालय की दक्षता बढ़ाते हैं और निर्भरता कम करते हैं।

मुद्दों की गहन और संतुलित जांच जरूरी
सीजेआई ने आगे कहा, 'न्यायालय कानूनी सिद्धांतों और विशिष्ट मामलों में उनके अनुप्रयोग पर गहन चर्चा और तर्क-वितर्क करते हैं। न्यायाधीश फैसले पर पहुंचने से पहले प्रत्येक पक्ष के तर्कों के गुणों पर सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श करते हैं, जिससे मुद्दों की गहन और संतुलित जांच सुनिश्चित होती है। जिस तरह से इमारतों की आधारशिला इसकी संरचना और अभिविन्यास को आकार देती है, उसी तरह न्याय और समानता की आधारशिला मामलों के प्रति न्यायालय के दृष्टिकोण के अभिविन्यास को आकार देना चाहिए। हमारी कानूनी और संवैधानिक प्रणाली मूल रूप से न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के गुणों पर आधारित है।'

तीन नए आपराधिक कानून पर सवाल पूछे जाने पर चंद्रचूड़ ने कहा, 'ये ऐसे मुद्दे हैं जो सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं, शायद संभवतः अन्य उच्च न्यायालय। इसलिए मुझे अदालत के समक्ष आने वाली किसी भी संभावित बात पर नहीं बोलना चाहिए।'

11 जिला अदालतें संचालित होंगी
बता दें कि अभी दिल्ली में सात कोर्ट कॉम्प्लेक्स में 11 जिला अदालतें संचालित हैं। तीन नए भवन बन जाने से 10 कोर्ट कॉम्प्लेक्स में 11 जिला अदालतें संचालित होंगी। कड़कड़डूमा कोर्ट कॉम्लेक्स से पूर्वी और उत्तर पूर्वी जिले की जिला अदालतें शिफ्ट की जाएंगी। मौजूदा कोर्ट कॉम्लेक्स में सं सिर्फ शाहदरा जिले की कोर्ट चालित होगी।

असमानता की खाई को पाटने के लिए न्यायिक प्रणाली को मजबूत करना जरूरी
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा, 'यह महसूस किया गया है कि हमारे जैसे विशाल लोकतंत्र में, कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए कानून और न्याय के शासन की आवश्यकता है। असमानता की खाई को पाटने के लिए न्यायिक प्रणाली को मजबूत करना और हमारे समाज के तेजी से बदलते ढांचे में असमानता को कम करने के सभी प्रयास करना अनिवार्य है। मुख्य न्यायाधीश शीघ्र समाधान के हित में भौतिक न्यायिक बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं। उन्होंने न केवल मामलों के तेजी से निपटान के लिए, बल्कि जांच और सुनवाई में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग पर भी जोर दिया है।'

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