केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के विलय से जुड़े दस्तावेजों पर बुचर पेपर का खुलासा देशहित में है। आयोग ने एक आदेश में कहा कि 1947-48 की अवधि से जुड़े जम्मू-कश्मीर के बारे में भारत के तत्कालीन द्वितीय सेना प्रमुख जनरल सर रॉय बुचर की ओर से नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी (एनएमएमएल) को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के खुलासे से विलय से संबंधित नई जानकारियां सामने आ सकती हैं।
सूचना आयुक्त उदय माहूरकर ने एनएमएमएल के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी से कहा कि वे आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक से सूचना साझा करने से पहले इस विषय को उच्च अधिकारियों के पास ले जाएं और आवश्यक अनुमति लें। हालांकि, सीआईसी ने यह नहीं बताया कि उच्च अधिकारियों के आपत्ति जताने के बाद सूचना का खुलासा किया जा सकता है या नहीं।
नायक ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत एनएमएमएल से दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन उसने आरटीआई कानून के किसी प्रावधान का हवाला देते हुए इसे देने से मना कर दिया था। मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद आयोग का कहना है कि आवेदक का मकसद देशहित में है। इसलिए आयोग केंद्रीय जन सूचना अधिकारी को इस मामले को उच्च अधिकारियों के पास ले जाने और आवेदक को सूचना साझा करने से पहले जरूरी अनुमति लेने का निर्देश देता है।
70 वर्ष बाद भी दस्तावेज लोगों की पहुंच से दूर
सूचना आयुक्त के आदेश के मुताबिक, उन्होंने (नायक) कहा कि तत्कालीन द्वितीय सेना प्रमुख ने विलय पत्र के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी निभाई थी। उनसे जुड़े कुछ दस्तावेजों का खुलासा सार्वजनिक तौर पर नहीं किया है, जो विलय की सच्चाई पर प्रकाश डाल सकता है। जनरल बुचर ने 1 जनवरी, 1948 से 15 जनवरी, 1949 तक तक भारतीय थल सेना के द्वितीय प्रमुख के रूप में सेवा दी थी। नायक ने कहा कि एनएमएमएल ने विदेश मंत्रालय के निर्देश पर 70 वर्ष बाद भी इन दस्तावेजों को लोगों की पहुंच से दूर रखा है।