तालिबान के साथ रिश्ते कायम करने की कोशिश में चीन
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अफगानिस्तान में तालिबान शासन को आए अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन पाकिस्तान और चीन सरीखे देशों ने इस आतंकी संगठन की मदद के लिए आवाज उठाना शुरू कर दिया। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने सोमवार को मीडिया ब्रीफिंग के दौरान अफगानिस्तान में आर्थिक संकट का मुद्दा उठाया और कहा कि अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफगान नागरिकों के लिए मदद भेजनी चाहिए।
पाकिस्तान ने भी उठाया अफगानिस्तान को मदद भेजने का मुद्दा
बता दें कि चीन जो भाषा बोल रहा है, एक दिन पहले वही भाषा पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) मोईद युसूफ ने कहा था कि दुनिया को अफगानिस्तान में तालिबान के साथ रचनात्मक बातचीत करने की जरूरत है, ताकि शासन व्यवस्था को ध्वस्त होने से बचाया जा सके तथा एक और शरणार्थी संकट को टाला जा सके। एक बयान में यूसुफ के हवाले से कहा गया है कि अफगानिस्तान में सोवियत-अफगान मुजाहिदीन संघर्ष के बाद पश्चिमी दुनिया ने अफगानिस्तान को अलग-थलग छोड़ने और इसके घनिष्ठ सहयोगियों पर पाबंदियां लगाकर भयावह गलतियां कीं।
चीन का पुराना राग- आतंकवाद से नाता तोड़े तालिबान
चीन ने कहा कि अफगान तालिबान को आतंकवाद से दूरी बनाने के अपने वादे को निभाना चाहिए और तत्काल प्रभाव से ऐसी ताकतों को खत्म करने पर काम करना चाहिए। झाओ ने कहा कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बड़ा खतरा है। चीन उन सभी देशों के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है, जो अफगानिस्तान में काम करना चाहते हैं। ताकि इस देश को आतंकवाद का केंद्र बनने से रोका जा सके।
झाओ लिजियान ने यूएन महासचिव के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने अफगानिस्तान को बड़े खतरे से बचाने के लिए सभी देशों से मदद की अपील की थी। चीनी प्रवक्ता ने बताया कि उनकी तरफ से 3.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर की मदद का एलान किया जा चुका है और अराजकता खत्म करने और व्यवस्था बहाल करने के लिए यह सहयोग जरूरी है। इस मदद के तहत चीन अफगानिस्तान को अनाज, सर्दी के सामान, कोरोना के टीके और जरूरत की दवाएं देगा।