अधिकारियों ने बताया कि जनरल चौहान की यात्रा के दौरान दोनों पक्ष रक्षा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने और नई प्रौद्योगिकियों को साझा करने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा संबंधों को और मजबूत करना है। उनका यह दौरा भारत-जापान रक्षा सहयोग के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालता है।
उम्मीद है कि टोक्यो में जनरल चौहान और उनके जापानी वार्ताकारों के बीच बातचीत में दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में संबंधित स्थिति की समीक्षा की जाएगी। दक्षिण चीन सागर भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। जबकि, जापान और चीन के बीच पूर्वी चीन सागर को लेकर लंबे समय से तनाव चल रहा है।
जनरल चौहान का रक्षा मंत्री मिनोरू किहारा, जापान सेल्फ डिफेंस फोर्सेज के चीफ ऑफ स्टाफ ऑफ ज्वाइंट स्टाफ जनरल योशिदा योशिहिदे और अधिग्रहण प्रौद्योगिकी एवं रसद एजेंसी (एटीएलए) के आयुक्त फुकासावा मासाकी से मिलने का कार्यक्रम है। मंत्रालय ने कहा कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का जापान के वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व के साथ बातचीत करने और रक्षा प्रतिष्ठानों का दौरा करने का कार्यक्रम है। जनरल चौहान हिरोशिमा शांति पार्क का भी दौरा करेंगे और क्षेत्र में शांति बढ़ाने के लिए महात्मा गांधी की प्रतिमा पर 'विशेष श्रद्धांजलि' अर्पित करेंगे।
इसके अलावा, वह राष्ट्रीय रक्षा अध्ययन संस्थान (एनआईडीएस) में फैकल्टी और रिसर्च स्कॉलर्स के साथ बातचीत करेंगे और विभिन्न सैन्य प्रतिष्ठानों का भी दौरा करेंगे। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 'बैठकों और वार्ताओं का मकसद आपसी समझ को बढ़ावा देना, क्षेत्रीय सुरक्षा पर विचारों का आदान-प्रदान, द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में योगदान के साथ-साथ रक्षा उपकरणों और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग करना है।'