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Chhattisgarh: इन चार लोकसभा सीटों पर कांग्रेस ने फाइनल किए नाम, भूपेश बघेल इस सीट से लड़ेंगे चुनाव

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 08 Mar 2024 03:08 PM IST

सार

जानकारों का कहना है कि राज्य की अभी सात सीटों को लेकर पेंच फंसा हुआ है। इन सीटों पर बड़े नेता चर्चा कर नाम तय करेंगे। बस्तर सीट से चुनाव लड़ने को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज अभी पसोपेश की स्थिति में हैं। जबकि सरगुजा सीट में पूर्व मंत्री तुलेश्वर सिंह की बेटी शशि सिंह का नाम सबसे ऊपर है...
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Chhattisgarh: Congress - फोटो : Amar Ujala/ Rahul Bisht


राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र में आने वाली विधानसभा सीट पर कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। ये क्षेत्र ओबीसी बाहुल्य क्षेत्र है। पूर्व सीएम बघेल भी इसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। राज्य का बड़ा ओबीसी चेहरा भी है। भाजपा ने यहां से सामान्य जाति के उम्मीदवार संतोष पांडेय को मैदान में उतारा है। पांडेय इसी सीट से सांसद हैं। जातिगत समीकरण और भूपेश की लोकप्रियता को भुनाने के लिए कांग्रेस राजनांदगांव से बघेल को उम्मीदवार बना रही है।

जांजगीर लोकसभा इस समय कांग्रेस के लिए सबसे मजबूत सीट है। जांजगीर लोकसभा सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित है। पूर्व मंत्री शिव डहरिया इसी समाज से ही आते हैं। पूर्व मंत्री रहने और अनुभव के आधार पर डहरिया को जांजगीर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया जा सकता है। डहरिया आरंग से विधानसभा चुनाव लड़ते रहे हैं, ये पहली बार होगा, जब उनका क्षेत्र लोकसभा के लिए बदला जा सकता है। भाजपा ने इस बार मौजूदा सांसद गुहाराम अजगले का टिकट काटकर कमलेश जांगड़े को प्रत्याशी बनाया है।

जबकि कोरबा सीट से ज्योत्सना महंत का नाम तय माना जा रहा है। वे यहां से मौजूदा सांसद हैं। ज्योत्सना महंत के पति चरणदास महंत सक्ति विधानसभा क्षेत्र से विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। इस क्षेत्र में महंत परिवार की अच्छी पकड़ है, लेकिन यहां से भाजपा ने सरोज पांडेय को टिकट देकर चौंका दिया है। सरोज पांडेय अब तक दुर्ग से ही चुनाव लड़ती रहीं है। ऐसे में कोरबा लोकसभा क्षेत्र उनके लिए नया है।

चर्चित बस्तर लोकसभा सीट के लिए कोंटा विधायक और पूर्व मंत्री कवासी लखमा ने अपने बेटे हरीश लखमा को प्रत्याशी बनाने की दावा ठोका है। बस्तर सीट से ही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज पिछले चुनाव में जीतकर सांसद बने थे। हालांकि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें चित्रकोट सीट से हार का सामना करना पड़ा। बस्तर में कवासी लखमा का सियासी कद बड़ा है। ऐसे में पार्टी उनकी मांग को भी दरकिनार नहीं कर सकती इसलिए ये फैसला अब केंद्रीय चुनाव समिति ही करेगी कि किसे टिकट दिया जा सकता है।

जानकारों का कहना है कि राज्य की अभी सात सीटों को लेकर पेंच फंसा हुआ है। इन सीटों पर बड़े नेता चर्चा कर नाम तय करेंगे। बस्तर सीट से चुनाव लड़ने को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज अभी पसोपेश की स्थिति में हैं। जबकि सरगुजा सीट में पूर्व मंत्री तुलेश्वर सिंह की बेटी शशि सिंह का नाम सबसे ऊपर है। हालांकि स्थानीय नेता उनके नाम का विरोध कर रहे हैं। केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट ने कहा कि जो भी जीतने की स्थिति में है, उसे पार्टी उसे चुनाव मैदान में उतारेगी।

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