राज्य के पहले सीएम अजीत जोगी ने अपने कार्यकाल में धान खरीदी का फैसला प्रमुखता से लिया, लेकिन जब 2003 में प्रदेश में पहला विधानसभा चुनाव हुआ तो भाजपा ने सत्ता पाने के लिए धान पर बोनस देने का वादा किया और कांग्रेस ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह हुआ है कि भाजपा ने बहुमत के साथ सरकार बनाई। किसानों को केंद्र के समर्थन मूल्य के अलावा प्रति क्विंटल 270 रुपए का बोनस भी दिया। यहीं से प्रदेश में धान की सियासत शुरू हुई। 2008 में भाजपा ने इसे 300 रुपए बोनस करने का वादा किया। परिणाम यह रहा है कि भाजपा 50 सीटों के बहुमत के साथ फिर से सत्ता में लौट आई। पार्टी ने अपने दोनों कार्यकाल में चुनावी साल में अपना वादा पूरा किया।
कैसे धान बना भाजपा की हार की सबसे बड़ी वजह
—2013 के घोषणा पत्र में भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में 2400 रुपए क्विंटल धान खरीदने का वादा किया था। जबकि 2000 रुपए की घोषणा कांग्रेस ने की थी। लेकिन भाजपा ने धान के दम पर फिर सरकार बना ली।
—2018 के चुनावी घोषणा पत्र में कांग्रेस ने अपने जन घोषणा पत्र में 2500 रुपए प्रति क्विंटल में धान खरीदी और कर्जमाफी का वादा किया था। भाजपा ने 24 सौ रुपए की बजाए अधिकतम 1740 रुपए ही दिए। यहीं नहीं चुनावों में भाजपा ने धान की एमएसपी पर कोई घोषणा नहीं की। यही वजह भाजपा की हार का सबसे बड़ा कारण बनी।
— 2023 के चुनावों को देखते हुए कांग्रेस वादा कर रही है कि अगर फिर सरकार बनी तो धान की खरीदी 3600 रुपए तक पहुंच सकती है। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सामान्य ग्रेड के धान का एमएसपी 2,183 रुपए प्रति क्विंटल है। जबकि किसान न्याय योजना की इनपुट सब्सिडी के साथ 2640 और 2660 रुपए प्रति क्विंटल दिया गया था।
— भाजपा के 15 वर्षों के राज में पूरी सियासत चावल पर ही केंद्रीत रही। 1 रुपए किलों चावल देकर रमन सिंह पूरे प्रदेश में चाउर वाले `बाबा` बन गए। बाबा की छवि को तोड़ने के लिए `कका` यानी सीएम भूपेश बघेल ने धान से धनवान हुए किसान का नया नारा दिया। सीएम बघेल ने धान का समर्थन मूल्य 2,500 रुपये करने का वादा कर पिछला विधानसभा चुनाव जीता थे।
— छत्तीसगढ़ की 80 प्रतिशत आबादी सीधे खेती से जुड़ी है। 2018 में 2500 रुपए समर्थन मूल्य से सत्ता में आई पार्टी 2023 में 2650 रुपए के समर्थन मूल्य तक पहुंच चुकी है। कांग्रेस सरकार चार साल में 85 हजार करोड़ किसानों को दे चुकी है।
प्रदेश की जीडीपी में 22 प्रतिशत हिस्सा धान का
प्रदेश की लगभग 44 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि में धान ही मुख्य फसल है। यहां की लगभग 80 फीसदी आबादी कृषि से ही जुड़ी हुई है। जीएसडीपी में करीब 22 प्रतिशत से अधिक योगदान है। कांग्रेस सरकार ने इस साल किसानों से प्रति एकड़ 20 क्विंटल के साथ ही कुल 125 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है। हर साल किसानों की संख्या बढ़ रही है। वर्ष2022—23 राज्य में कुल 2.30 लाख पंजीकृत किसान है। प्रदेश के 90 विधानसभा क्षेत्रों में से 47 में किसान मतदाता प्रभावी भूमिका में हैैं। पिछले विधानसभा चुनाव में किसानों के प्रभाव वाली ग्रामीण क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों की 30 से 50 हजार वोटों से जीत हुई थी।