राज्य विधानसभा चुनाव के पहले चरण लिए 13 अक्तूबर को अधिसूचना जारी होगी। 20 अक्तूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। पहले चरण में नामांकन पत्रों की जांच 21 अक्तूबर को की जाएगी। 23 अक्तूबर तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे।
दूसरे चरण के लिए 21 अक्तूबर को अधिसूचना जारी की जाएगी तथा 30 अक्तूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। 31 अक्तूबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। दो नवंबर तक नामांकन पत्र वापस लिए जा सकेंगे।
ऐसे में हर कोई जानना चाहता है कि छत्तीसगढ़ की मौजूदा राजनीतिक स्थिति क्या है? मुख्यमंत्री पद के चेहरे कौन-कौन से हैं? चुनाव प्रचार में बड़े चेहरे कौन-कौन से हैं? चुनाव के बड़े मुद्दे क्या हैं? किन-किन के बीच मुकाबला है? इस बार 2018 के मुकाबले समीकरण कितने अलग हैं? आइए विस्तार से समझते हैं...
राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति क्या है?
इस चुनाव में कांग्रेस के सामने सरकार बचाने की चुनौती होगी। वहीं, भाजपा एक बार फिर राज्य की सत्ता में आने की कोशिश करेगी। इस बीच भाजपा ने छत्तीसगढ़ के लिए 21 उम्मीदवारों का एलान कर दिया है। इन सभी 21 सीटों पर इस वक्त कांग्रेस का कब्जा है। जानकारी के मुताबिक, जल्दी ही पार्टी उम्मीदवारों की दूसरी सूची भी जारी कर सकती है। वहीं, आप ने दो सूची जारी कर राज्य के लिए 22 उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। सत्ताधारी कांग्रेस ने अब तक कोई सूची नहीं जारी की है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के सियासी समीकरण की बात करें तो इस वक्त 90 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 71, भाजपा के 14, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के चार और बसपा का एक विधायक है।
मुख्यमंत्री पद के चेहरे कौन?
राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हैं और संकेत हैं कि इस बार भी उनके चेहरे के साथ ही पार्टी चुनाव में जाएगी। विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से कुछ समय पहले टीएस सिंहदेव को पार्टी ने उपमुख्यमंत्री बनाकर कुछ हद तक उनकी नाराजगी दूर करनी की कोशिश की है। पिछले चुनाव में टीएस सिंहदेव के साथ ही साथ ताम्रध्वज साहू मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल थे।
वहीं राज्य की मुख्य विपक्षी भाजपा के रुख की बात करें तो वह इस चुनाव में सामूहिक नेतृत्व के जरिए जनता के सामने जा रही है। स्पष्ट रूप से पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह राज्य के सबसे बड़े चेहरे हैं, लेकिन पार्टी उन्हें सीएम फेस के रूप में सामने नहीं ला रही है।
चुनाव प्रचार के चेहरे कौन?
कांग्रेस के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ-साथ प्रियंका गांधी और राहुल गांधी प्रदेश में काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही पार्टी के प्रमुख नेता मल्लिकार्जुन खरगे, टीएस सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू भी चुनावी कार्यक्रमों में नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा ने पार्टी के चुनाव प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उतारा है। चेहरा न होने के बावजूद खुद पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह भी चुनावी कार्यक्रमों में लगातार शिरकत कर रहे हैं।
चुनाव के बड़े मुद्दे क्या हैं?
इस चुनाव में मौजूदा सरकार के सामने बेरोजगारी जैसा बड़ा मुद्दा है। पिछले कुछ समय में प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। इस साल मार्च में घोषित छत्तीसगढ़ पीएससी की 2021 परीक्षा के परिणाम में भाजपा ने चयन सूची में भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया। पार्टी ने दावा किया कि नौकरशाहों और राजनीतिक नेताओं के रिश्तेदारों का चयन किया गया है। वहीं मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी सरकार से जांच करने को कहा है।
राज्य में आबकारी नीति में हुए भ्रष्टाचार की जांच ईडी कर रही है, जिसमें कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है। भाजपा लगातार राज्य में भ्रष्टाचार और कानून व्यस्था के मुद्दों को अपने कार्यक्रमों में उठा रही है। हाल ही में जगदलपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया था कि छत्तीसगढ़ में अपराध चरम पर है, हत्याओं के मामले में छत्तीसगढ़ अग्रणी राज्यों में पहुंच चुका है। इस बीच महिला वोटर को साधने के लिए कांग्रेस गारंटियों की बात कर रही है। राहुल गांधी ने कई मौकों पर कर्नाटक विधानसभा में पार्टी द्वारा किए गए चुनावी वादों का जिक्र किया है।
वहीं, भाजपा आगामी चुनाव के लिए महिला आरक्षण को सामने रख रही है। इसके अलावा आप ने छत्तीसगढ़ में भी 10 चुनावी गारंटियां घोषित की हैं। इसमें महिलाओं, युवाओं, आदिवासियों और किसानों से जुड़े मुद्दे रखे गए हैं।
किनके-किनके बीच मुकाबला है?
इस चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच होने की उम्मीद है। इसके अलावा आप, बसपा जैसे दल भी अपनी दावेदारी को मजबूत बता रहे हैं।
पिछली बार कब हुए थे चुनाव?
2018 में राज्य में दो चरणों मतदान कराए गए थे। पहले चरण का मतदान 12 नवंबर 2018 और दूसरे चरण का मतदान 20 नवंबर 2018 को संपन्न हुआ था। छत्तीसगढ़ के चुनाव नतीजे 11 दिसंबर को आए थे। चुनाव नतीजे आए तो 90 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस को 68 और भाजपा को 15 सीटें मिलीं। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने पांच सीटें जीते थीं और दो सीटें बसपा के खाते में गई थीं। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद हुए पांच उपचुनावों में से पांचों पर सत्ताधारी कांग्रेस ने जीत दर्ज की। इनमें से दो सीटें पहले से ही उसके पास थी जबकि पार्टी ने एक सीट भाजपा की तो दो सीटें जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की छीन लीं।