किसी कंपनी का प्रबंधक या एमडी कंपनी के रोजमर्रा के प्रबंधन का प्रतिनिधित्व तो करता ही है, किसी आपराधिक मामले में कंपनी की ओर से अदालत की शरण भी ले सकता है। यह बात सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चेक बाउंस होने के एक मामले की सुनवाई में कही।
जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश ने कहा कि किसी कंपनी की शिकायत में उसका कोई व्यक्ति प्राकृतिक रूप से प्रतिनिधित्व करेगा। कंपनी एक कानूनी शिकायतकर्ता है, लेकिन उसका व्यक्ति वास्तविक शिकायतकर्ता। वह अदालती कार्यवाही में कंपनी का प्रतिनिधित्व करता है। अगर कंपनी ने ऐसा कोई प्रतिनिधि अदालत में नहीं भेजा है तो वह इस गलती को सुधार कर एक योग्य व्यक्ति को भेज सकती है।
विचाराधीन मामला बेल मार्शल टेलीसिस्टम्स लि. के एमडी भूपेश राठौड़ की बॉम्बे हाईकोर्ट के एक निर्णय के खिलाफ दायर अपील का है। हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के आरोपी दयाशंकर चौरसिया को रिहा करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ भूपेश की याचिका खारिज कर दी थी। भूपेश ने कंपनी के प्रतिनिधि के तौर पर केस किया। उसे मामले के लिए कंपनी की ओर से अधिकृत करने का बोर्ड द्वारा पारित प्रस्ताव भी दिया गया। वहीं दयाशंकर की आपत्ति थी कि भूपेश ने उसके खिलाफ व्यक्तिगत शिकायत दर्ज करवाई है, कंपनी के प्रतिनिधि के तौर पर नहीं।