बता दें, इसी वर्ष 25 फरवरी को एंटीलिया के पास एक विस्फोटक लदी कार मिली थी। इस कार से पुलिस ने 20 जिलेटिन की छड़ें बरामद की थीं। इस खबर से मुंबई से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया था। उस वक्त मुंबई पुलिस की खुफिया शाखा के प्रमुख रहे सहायक पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे इसकी जांच कर रहे थे। चूंकि मामला विस्फोटकों और देश के नामी उद्योगपति से जुड़ा था, इसलिए जांच को एनआईए ने अपने हाथ में ले लिया था। बाद में एनआईए ने वाजे को ही पूरी साजिश का सूत्रधार बताते हुए गिरफ्तार कर लिया था।
एनआईए की चार्जशीट में कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'टेलीग्राम' पर एक फर्जी पोस्ट में जारी पत्र में जानबूझकर जैश उल हिंद का नाम लिखा गया था। इसके जरिये वाजे का उद्देश्य एक आतंकी घटना को हल करने का श्रेय लेकर मुंबई पुलिस में दोबारा अपना दबदबा बनाना था। इसके लिए उसने एक फर्जी एनकाउंटर की योजना भी बना रखी थी।