केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हम देश के विकास में में गैर-लाभकारी और स्वैच्छिक संगठनों की भूमिका को पहचानते हैं और सही गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 के तहत अनिवार्य किसी भी नियामक अनुपालन से दूर होने की जरूरत नहीं है।
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शीर्ष अदालत में दायर एक हलफनामे में, जो विदेशी योगदान विनियमन (संशोधन) अधिनियम 2020 से संबंधित मुद्दों को उठाने वाली याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई कर रही है, सरकार ने कहा है कि विनियमन के बिना विदेशी योगदान प्राप्त करने का कोई अधिकार नहीं है।
केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि एसोसिएशन बनाने के अधिकार और व्यापार व पेशे की स्वतंत्रता के अधिकार में बेलगाम और अनियमित विदेशी योगदान प्राप्त करने का अधिकार शामिल नहीं हो सकता। न्यायाधीश एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले पर अब 28 अक्तूबर को सुनवाई करेगी।