सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूनिटेक ग्रुप के नए बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट को व्यावहारिक रुख अपनाने और सुरक्षा एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (एआरसी) के साथ बातचीत करने को कहा ताकि बकाया दावों पर उनके विवाद को सुलझाया जा सके। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने कहा कि सुरक्षा एआरसी के प्रबंधन को अपने दृष्टिकोण को संशोधित करना होगा और पर्याप्त कटौती करनी होगी अन्यथा अगर यह दिवाला और दिवालियापन संहिता के तहत जाता है, तो हो सकता है कि उन्हें कुछ भी नहीं मिले।
व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह
बेंच ने कहा कि जिस तरह से सुरक्षा एआरसी के दावों पर विवाद का समाधान नहीं हो रहा है, उससे हम संतुष्ट नहीं हैं। एआरसी के प्रबंधन को सावधान रहना चाहिए कि उन्हें पर्याप्त कटौती करनी पड़े। हमें अच्छा लगेगा अगर यूनिटेक बोर्ड विवाद को सुलझाने के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाए।
अदालत ने दोनों पक्षों को शनिवार से सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चर्चा करने और विवाद को सुलझाने का प्रयास करने को कहा है। दोनों पक्ष शनिवार से इस मुद्दे के हल होने तक चर्चा करेंगे। पीठ ने कहा और मामले को आगे की सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया है।
शीर्ष अदालत यूनिटेक के नए बोर्ड की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें रुकी हुई परियोजनाओं के निर्माण के लिए परियोजना प्रबंधन सलाहकार (पीएमसी) की नियुक्ति की अनुमति मांगी गई थी। शुरुआत में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन ने कहा कि उन्हें यूनिटेक के घर खरीदारों को राहत प्रदान करने के लिए पीएमसी की नियुक्ति के लिए अनुमति की आवश्यकता है, लेकिन वे सुरक्षा एआरसी के साथ अपने विवाद को सुलझाने में असमर्थ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों का समाधान होना बाकी है और वे इस संबंध में और चर्चा करेंगे।