केंद्र ने गुरुवार को विपणन वर्ष 2023-24 में एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के रस और चीनी सिरप के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया। विपणन वर्ष 2023-24 इसी महीने शुरू हुआ है। हालांकि, सरकार ने 2023-24 में एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के उप-उत्पाद 'बी-हेवी शीरे' के इस्तेमाल की अनुमति दी है।
कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की सरकार की पहल के तहत बेरंग तरल पदार्थ एथनॉल को ईंधन के साथ मिलाया जाता है। कांग्रेस और राकांपा विधायकों द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के बाद अजित पवार ने विधानसभा में कहा, गन्ने के सिरप से एथनॉल उत्पादन पर प्रतिबंध लगाने का फैसला अचानक लिया गया है। कई चीनी मिलों ने अपनी पूंजी का पांच फीसदी और बाहर से 95 फीसदी पैसा उधार लेकर एथनॉल संयंत्रों में निवेश किया है।
विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि केंद्र के फैसले से महाराष्ट्र की उन चीनी मिलों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, जिन्होंने गन्ने के सिरप और शीरे से एथनॉल का उत्पादन करने के लिए इकाइयां स्थापित करने के लिए कर्ज लिया है। अजित पवार ने कहा, मैंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राज्य के सहकारिता मंत्री दिलीप वाल्से-पाटिल के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की है। मैंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी बात की है, जिन्होंने मुझे अगले दो दिनों में समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, अगर कोई समाधान नहीं निकलता है तो हम नई दिल्ली जाएंगे और उनके (अमित शाह) साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। मैंने इस मामले को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के समक्ष भी उठाया है।
खाद्य मंत्रालय ने सभी चीनी मिलों और डिस्टिलर्स को लिखे एक पत्र में उन्हें 2023-24 विपणन वर्ष (दिसंबर-नवंबर) के दौरान एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के रस/चीनी सिरप का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया। पत्र में मंत्रालय ने कहा कि तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा बी-हैवी शीरे से प्राप्त मौजूदा प्रस्तावों से एथनॉल की आपूर्ति जारी रहेगी। मंत्रालय का यह फैसला विपणन वर्ष 2023-24 (अक्तूबर-सितंबर) में चीनी उत्पादन में अनुमानित गिरावट की पृष्ठभूमि में आया है।