सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़े मामले सभी मंत्रालयों एवं विभागों द्वारा 'डीओपीटी' की सलाह से निपटाए जा रहे हैं। मनमोहन वर्मा ने बताया, सभी विभागों में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के तहत पदोन्नति दी जा रही है। डीओपीटी द्वारा भी इस बाबत जरूरी दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। यहां पर विशेष बात ये है कि डीओपीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को दूसरे मंत्रालयों एवं विभागों में माना जा रहा है, लेकिन केंद्रीय सचिवालय में कार्य कर रहे कर्मचारियों की पदोन्नति पर डीओपीटी ने रोक लगा रखी है। हैरानी की बात है कि डीओपीटी अन्य सभी मंत्रालयों एवं विभागों के अन्तर्गत आने वाले सभी संवर्गो में लगातार पदोन्नति कर रहा है। केंद्रीय सचिवालय में कार्यरत योग्य अधिकारियों के प्रमोशन न होने के कारण उनके करियर पर विपरित असर पड़ रहा है।
केंद्रीय सचिवालय फोरम के पदाधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति के मामले में बरते जा रहे इस भेदभाव का असर उनके करियर पर पड़ रहा है। जब कोई कर्मचारी अपनी बेहतर सेवाएं देने के बावजूद बिना किसी प्रमोशन के सेवानिवृत होता है तो उसे ही नहीं, बल्कि उसके साथ काम करने वाले दूसरे कर्मियों को भी धक्का लगता है। ये सभी वे कर्मचारी हैं, जिन्होंने हर तरह की मुसीबत में केंद्र सरकार का साथ दिया है। देश के लिए नीति निर्माण और दूसरे अहम फैसलों को लागू करने में केंद्रीय सचिवालय के कर्मियों का अहम योगदान रहा है। अब लंबे समय से सचिवालय में पदोन्नति बंद है। इस स्थिति के कारण कर्मियों में एक निराशा का माहौल बन गया है। पिछले पांच साल के दौरान केंद्रीय सचिवालय में प्रमोशन न होने की वजह से कर्मचारी चयन आयोग द्वारा जारी भर्ती की संख्या में भी वर्ष दर वर्ष कमी आ रही है। पदोन्नति के लिए जूझ रहे बीस हजार कर्मियों में चार कैडर, केंद्रीय सचिवालय सेवा, केंद्रीय लिपिक सेवा, केंद्रीय स्टेनाग्राफर सेवा और केंद्रीय राजभाषा सेवा, शामिल हैं।