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दो टूक: केंद्र सरकार ने फेसबुक से कहा, बताओ- हिंसा, झूठ, भड़काऊ सामग्री को कैसे रोकते हो?

Fri, 29 Oct 2021 05:15 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

हाल में हुए खुलासों में अमेरिका में फेसबुक के पूर्व कर्मचारियों ने बताया था कि प्लेटफॉर्म समाज को बांटने, हिंसा व झूठ फैलाने का माध्यम बन चुका है। उन्हाेंने खुद अंदरूनी गोपनीय दस्तावेज भी लीक किए थे।
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फेसबुक - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने फेसबुक से झूठी सूचनाएं, हिंसा, वैमनस्य, भड़काऊ सामग्री को पकड़ने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी मांगी है। केंद्र ने पूछा है, उसका अल्गोरिदम व अन्य व्यवस्थाएं कैसे काम करती हैं? इन्हें रोकने के लिए वह क्या कर रहा है?

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हाल में हुए खुलासों में अमेरिका में फेसबुक के पूर्व कर्मचारियों ने बताया था कि प्लेटफॉर्म समाज को बांटने, हिंसा व झूठ फैलाने का माध्यम बन चुका है। उन्हाेंने खुद अंदरूनी गोपनीय दस्तावेज भी लीक किए थे।

दस्तावेज में खासतौर से भारत को लेकर उदाहरण हैं कि किस प्रकार फेसबुक यहां की शासन और लोक व्यवस्था बिगाड़ रहा है। केंद्रीय आईटी मंत्रालय ने फेसबुक से उन कदमों की जानकारी मांगी है, जो उसने भारत में अपने प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाए हैं। 
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कंपनी की एक अंदरूनी रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि भारत में फेसबुक फरेब, भ्रामक खबरें और हिंसा फैलाने का माध्यम बन गया है। भारत उसके लिए विश्व का सबसे बड़ा बाजार है, लेकिन खामियां सुधारने के लिए उठाए उसके कदम, लोगों की जान की कीमत पर महज प्रयोग से ज्यादा कुछ नहीं हैं।

इन भ्रामक पोस्ट का दुष्प्रभाव पूरे भारत और चुनाव प्रक्रिया पर भी हो रहा है। ये खामियां कैसे दूर होंगी? यह सब उसे खुद भी पता नहीं है। यहां तक कि खुद बिगाड़े इन हालात को सुधारने के लिए उसने उचित संख्या में स्टाफ या संसाधन भी नहीं रखे और इसके लिए पैसा खर्च करना वह बेकार मानता है।

'विरोधात्मक और नुकसानदेह नेटवर्क भारत एक केस स्टडी’ नामक इस दस्तावेज को कंपनी के ही अध्ययनकर्ताओं ने तैयार किया है। इसके अनुसार फेसबुक पर ऐसे कई ग्रुप व पेज चल रहे हैं, जो मुसलमानों व भारतीय समाज के कमजोर तबकों के खिलाफ काम कर रहे हैं।

फेसबुक के अवैध कार्यों की जानकारी दे रही यह रिपोर्ट उसकी पूर्व कर्मचारी फ्रांसेस ह्यूगन ने फेसबुक के कई अहम दस्तावेज के साथ तैयार की है। 2019 के आम चुनाव के बाद भी भारत पर ऐसी ही रिपोर्ट में फेसबुक द्वारा झूठी खबरें फैलाने व व्यवस्था बिगाड़ने की पुष्टि हुई। उसके अनुसार पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा देखे गए कंटेंट के 40 फीसदी व्यू फर्जी थे। वहीं तीन करोड़ भारतीयों तक पहुंच रखने वाला अकाउंट अनधिकृत मिला था।

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