अनुच्छेद 131 के तहत दायर याचिका में 27 मार्च और 11 अगस्त 2023 को केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से जारी पत्रों का हवाला दिया गया। आरोप लगाया कि मुक्त बाजार सहित सभी स्रोतों से सकल ऋण लेने की क्षमता पर सीमा लगाकर केंद्र अनावश्यक हस्तक्षेप करने का प्रयास कर रहा है।
केरल सरकार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्य के वित्त में हस्तक्षेप कर रही है। उसने राज्य की सकल ऋण सीमा पर सीलिंग लगाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें कहा कि राज्य में वित्त से जुड़े विषयों पर नियम बनाने का एकमात्र, स्वायत्त और पूर्ण अधिकार केवल केरल सरकार को है। संविधान में अधिकार दिए गए हैं।
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अनुच्छेद 131 के तहत दायर याचिका में 27 मार्च और 11 अगस्त 2023 को केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से जारी पत्रों का हवाला दिया गया। आरोप लगाया कि मुक्त बाजार सहित सभी स्रोतों से सकल ऋण लेने की क्षमता पर सीमा लगाकर केंद्र अनावश्यक हस्तक्षेप करने का प्रयास कर रहा है। साथ ही बताया कि राज्य को बीते वर्षों का 26,226 करोड़ का भुगतान इस साल 31 अक्तूबर तक लंबित हो चुका है।
वित्तीय संकट को टालने के लिए तत्काल भुगतान जरूरी
ऋण पर सीलिंग से राज्य पर आए गंभीर वित्तीय संकट को टालने के लिए यह भुगतान तत्काल करना जरूरी है। याचिका के अनुसार केंद्र की कार्यवाही संविधान में निर्धारित संघीय ढांचे का उल्लंघन करती है। केरल में ऋण पर सीलिंग या ऋण सीमा तय करने के लिए वित्तीय जवाबदेही अधिनियम 2003 बना हुआ है। बजट और घाटे की भरपाई के लिए ऋण लेकर संतुलन बनाना राज्य का काम है। अगर वह जरूरी ऋण नहीं ले सकेगा, तो वित्त वर्ष के लिए निर्धारित योजनाएं पूरी नहीं कर पाएगा।