सीबीआई को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले सांसद मुकुल रॉय और टीएमसी सांसद अपूर्व पोद्दार के खिलाफ 2014 के नारद स्टिंग टेप मामले में कोई सबूत नहीं मिला था।
लेकिन अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि जांच एजेंसी की तरफ से सुवेंदु अधिकारी समेत चार अन्य के खिलाफ अभियोजन शुरू करने के लिए मांगी गई इजाजत दो साल से लोकसभा अध्यक्ष के पास लंबित है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मामले में जांच अभी जारी है और किसी को भी क्लीन चिट नहीं दी गई है।
अधिकारियों ने कहा कि सीबीआई ने 6 अप्रैल, 2019 को लोकसभा अध्यक्ष को सुवेंदु अधिकारी, सौगत रॉयस, काकोली घोष दस्तिदार और प्रसून बनर्जी के खिलाफ अभियोजन शुरू करने के लिए लिखित आवेदन दिया था। यह अनुमति इन सभी के कथित स्टिंग ऑपरेशन के समय निचले सदन का सदस्य होने के कारण मांगी गई थी।
एक समय पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के सबसे करीबियों में से एक सुवेंदु ने पिछले साल दिसंबर में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। उन्होंने हालिया विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के खिलाफ नंदीग्राम सीट से बेहद नजदीकी अंतर से जीत हासिल कर अपना रुतबा कायम किया है। इसके चलते भाजपा ने उन्हें विधानसभा में नेता विपक्ष नियुक्त किया है।
क्या है नारद कांड
नारद घोटाला टेप के नाम से चर्चित यह कांड 2014 में नारद टीवी न्यूज चैनल के मैथ्यू सैम्युअल की तरफ से किए गए स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ा है। सीबीआई के मुताबिक, इस स्टिंग में टीएमसी के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को कथित तौर पर एक नकली कंपनी के प्रतिनिधि से मदद करने के बदले गैरकानूनी पैसा लेते हुए दिखाया गया था। ये स्टिंग टेप 2016 में पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव से पहले लीक की गई थी।
हालांकि इसका चुनाव परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा था और ममता बनर्जी ने जीत दर्ज कर सत्ता में वापसी की थी। इस मामले में कोलकाता हाईकोर्ट ने अप्रैल, 2017 में सीबीआई को जांच का आदेश दिया था।