सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) के अधिकारी अभिषेक तिवारी ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच को कथित तौर पर लीक करने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी। बुधवार को एजेंसी ने इस याचिका का विरोध करते हुए तिवारी के खिलाफ लगे आरोपों को गंभीर बताया। एजेंसी ने इसे लेकर कहा कि अभिषेक तिवारी को जमानत पर रिहा करने से जांच प्रभावित होने की आशंका है।
तिवारी की जमानत याचिका के जवाब में सीबीआई ने कहा कि एजेंसी के एक अधिकारी होने के नाते उनकी ड्यूटी थी कि उन लोगों की पहचान करें और न्याय तक लाएं जो भ्रष्टाचार में संलिप्त रहते हैं। लेकिन, तिवारी को ही भ्रष्टाचार का आरोपी पाया गया। सीबीआई ने कहा कि ऐसे में अपराध काफी गंभीर है और जमानत देने से जांच पर असर पड़ सकता है। अदालत ने मामले की सुनवाई की अगली तारीख पांच अक्तूबर तय कर दी।
बता दें कि इस मामले में सीबीआई ने अपने सब इंस्पेक्टर अभिषेक तिवारी, नागपिर के वकील आनंद डागा और कुछ अन्य लोगों को विभिन्न आरोपों में गिरफ्तार किया था। आनंद डागा, देशमुख के वकील के तौर पर काम कर रहे थे। डागा को एजेंसी ने अनिल देशमुख के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से जारी निर्देश के बाद शुरू हुई प्रारंभिक जांच को कथित रूप से विफल करने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
तिवारी की याचिका के अनुसार उसे 30 अगस्त को हिरासत में लिया गया था और एक सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। वह छह सितंबर से न्यायिक हिरासत में है। सीबीआई की एक विशेष अदालत ने आठ सितंबर को उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। तिवारी ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी है। सीबीआई ने कहा है कि यह केस, एक अन्य गंभीर अपराध की जांच को अवैध तरीके से रोकने के लिए अपराध करने का मामला है।