दूसरी ओर रिश्वत के एक मामले में सीबीआई ने मंगलवार को ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) के प्रवर्तन अधिकारी को गिरफ्तार किया है। अधिकारी पर कथित तौर पर एक लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। यह कार्रवाई हरियाणा के जगधारी में नियुक्त प्रवर्तन अधिकारी अनिल कुमार के खिलाफ एक शिकायत के बाद की गई।
आयकर विभाग ने मंगलवार को गुजरात की दो प्रमुख कंपनियों एस्ट्रल पाइप्स और रत्नमणि मेटल्स के चार राज्यों में 40 ठिकानों पर छापे मारे। इसमें गुजरात के अहमदाबाद में 25 और महाराष्ट्र, दिल्ली व राजस्थान के 15 ठिकाने शामिल हैं। एस्ट्रल पाइप्स के चेयरमैन संदीप इंजीनियर और रत्नमणि के चेयरमैन प्रकाश सांघवी की आयकर विभाग जांच कर रहा है। इसके अलावा दोनों कंपनियों के अन्य निदेशकों की भी जांच की जा रही है।
प्रवर्तन निदेशालय ने तेलंगाना में इंश्योरेंश मेडिकल स्कीम (आईएमएस) चिकित्सा बीमा योजना में घोटाला मामले में 144 करोड़ की संपत्ति जब्त की है। जांच एजेंसी ने सोमवार को इस मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में 131 अचल संपत्ति को जब्त करने का अस्थायी आदेश जारी किया था। इनमें 97 प्लॉट, छह विला, 18 दुकानें, छह कृषि भूमि और चार फ्लैट शामिल हैं। ये संपत्तियां तेलंगाना के हैदराबाद व कुछ अन्य ठिकाने, बेंगलुरु और नोएडा में हैं।
जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि ईडी ने सावधि जमा और प्रतिभूति के रूप में चल संपत्तियों को भी जब्त किया है। उन्होंने बताया कि इन संपत्तियों का कुल मूल्य 144.4 करोड़ रुपये हैं। ईडी ने तेलंगाना भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) द्वारा योजना से जुड़े अधिकारियों, मेडिकल सप्लायर और अन्य लोगों के खिलाफ आठ एफआईआर के अध्ययन के बाद मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। इस मामले में टेंडर प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन, सरकारी धन के गबन से खजाने को 211 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
बताया जाता है कि आईएमएस की तत्कालीन निदेशक डॉ. देविका रानी ने संयुक्त निदेशक और अन्य कर्मियों के की मिलीभगत से सभी सरकारी नियमों की अनदेखी करते हुए खरीद का आदेश उन कंपनियों को जारी कर दिया, जो ज्यादातर सप्लायर के श्रीहरि बाबू की और डॉ. रानी की बेनामी कंपनियां थीं।