टी-20 वर्ल्डकप 2021 में भारत के खराब प्रदर्शन के बाद कप्तान से लेकर कोच तक काफी चीजें बदल चुकी हैं। दुबई में आयोजित हुए वर्ल्डकप में भारत को खिताब जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन टीम इंडिया सेमीफाइनल तक भी नहीं पहुंच पाई। इस टूर्नामेंट से पहले ही कप्तान और कोच ने अपना पद छोड़ने का एलान कर दिया था। विराट और शास्त्री के बाद 2022 विश्वकप जिताने की जिम्मेदारी रोहित और द्रविड़ पर है। इस बार यह टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलिया में होगा और निश्चित रूप से ऑस्ट्रेलिया ही खिताहब जीतने की प्रबल दावेदार होगी। रोहित-द्रविड़ की जोड़ी यह बात भली भांति समझती है। इस वजह से टीम इंडिया ने इसी लिहाज से तैयारी भी शुरू कर दी है।
2021 वर्ल्डकप में भारत ने अपने खराब प्रदर्शन से बाकी टीमों को चौकाया था और 2022 वर्ल्डकप में टीम इंडिया अपने अच्छे प्रदर्शन से सभी को चौंकाना चाहेगी। इसकी तैयारी न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज से शुरू हो चुकी है। यहां हम उन पांच सकारात्मक पहलुओं के बारे में बता रहे हैं, जो भारत को इस सीरीज में मिले हैं।
1. हार्दिक का रिप्लेसमेंट मिला
2021 टी-20 वर्ल्डकप में भारत की हार में हार्दिक का बड़ा योगदान था। उन्होंने अपनी चोट छिपाकर यह टूर्नामेंट खेला और गेंद या बल्ले से अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए। उनके गेंदबाजी न करने से टीम का संतुलन खराब हुआ और कप्तान रणनीति बनाने की बजाय छठवें गेंदबाज की तलाश में उलझे रहे। ऐसे में उनकी जगह ऐसे खिलाड़ी की जरूरत थी, जो अच्छी बल्लेबाजी करने के साथ तेज गेंदबाजी करने में सक्षम हो और वेंकटेश ने न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में यह क्षमता दिखाई है। आखिरी मैच में उन्होंने 25 रन की उपयोगी पारी खेली और बाद में 12 रन देकर एक विकेट भी लिया। समय के साथ वेंकटेश और बेहतर हो सकते हैं। उनके अंदर क्या क्षमता है ये उन्होंने इस सीरीज में दिखाया है।
2. हर्षल पटेल ने सुलझाई डेथ ओवरों की समस्या
इस सीरीज में हर्षल पटेल ने बीच के ओवरों में और आखिरी ओवरों में शानदार गेंदबाजी की। वो भारत के लिए तीसरे तेज गेंदबाज बनके उभरे हैं। बुमराह और शमी के बाद हर्षल या भुवनेश्वर भारत के तीसरे गेंदबाज हो सकते हैं। इस वर्ल्डकप में भुवनेश्वर अच्छी फॉर्म नहीं थे, ऐसे में उनकी जगह हर्षल को टीम में शामिल किया जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया कि पिचों पर तीसरे तेज गेंदबाज की अहमियत ज्यादा होगी। हर्षल के विकेट लेने की क्षमता और उनकी धीमी गेंद ऑस्ट्रेलिया के बड़े मैदानों पर कारगर साबित हो सकती है।
3. दीपक और हर्षल की बल्लेबाजी
भारतीय टीम के लिए बल्लेबाजी में निचले क्रम का योगदान काफी कम रहा है। टेस्ट हो या वनडे या फिर टी-20 हर फॉर्मेट में भारतीय गेंदबाज बल्ले से टीम की मदद नहीं कर पाते हैं, लेकिन इस सीरीज में ऐसा नहीं था। तीसरे मैच में दीपक चाहर और हर्षल पटेल ने बल्ले के साथ भी योगदान दिया और इन दोनों के बनाए रनों ने ही मैच में बड़ा फर्क डाला। इस सीरीज में इन दोनों ने कुल 19 गेंदें खेली और 39 रन बनाए। भारत के लिए यह बहुत बड़ा सकारात्मक पहलू था।
4. स्पिन जोड़ी ने किया कमाल
इस सीरीज में अश्विन और अक्षर पटेल की स्पिन जोड़ी न सिर्फ विकेट चटकाए बल्कि बीच के ओवरों में रन भी नहीं दिए। वहीं तीसरे मैच में अक्षरर पटेल ने पावरप्ले में गेंदबाजी की और वहां भी भारत को अहम विकेट दिलाए। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण चीज थी। इन दोनों ने मिलकर सीरीज में सात विकेट निकाले। इन दोनों की इकोनॉमी छह से भी कम थी। इन दोनों ने आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स के लिए शानदार गेंदबाजी की थी और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में भी वैसा ही प्रदर्शन किया।
5. रोहित और राहुल ने खिलाड़ियों को भरोसा दिलाया
टी-20 वर्ल्डकप के बाद भारत के कई खिलाड़ी थके हुए थे और उन्हें इस सीरीज में आराम दिया गया। उनकी जगह कई युवा खिलाड़ियों को मौका दिया गया। कप्तान रोहित और कोच राहुल ने मिलकर खिलाड़ियों को यह भरोसा दिलाया कि उनके आराम करने पर अगर बाकी खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करते हैं तब भी उन्हें टीम से बाहर नहीं किया जाएगा। इससे पहले टीम में यह बात नहीं थी। इस वजह से खिलाड़ियों ने बिना किसी हिचकिचाहट के आराम किया। कोई भी खिलाड़ी अपनी चोट छिपाकर नहीं खेला और टेस्ट सीरीज से पहले राहुल ने भी मांसपेशियों में खिंचाव होने पर पूरी सीरीज में आराम करने का फैसला किया है।