एनआईए की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने चीफ जस्टस एन वी रमण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यों पीठ के समक्ष कहा कि जमानत देने के अलावा हाईकोर्ट ने तस्करी के संबंध में एंटी टेरर लॉ की परिभाषा की व्याख्या की है, लिहाजा इस पहलू पर विचार करने की आवश्यकता है। पीठ ने जमानत रद्द करने के पहलू में विचार करने से तो इनकार कर दिया लेकिन कहा कि वह गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम(यूएपीए) की व्यवहारिकता के मुद्दे पर विचार करने पर सहमत है।
शीर्ष अदालत ने 12 आरोपियों को मिली जमानत रद्द करने से किया था इंनकार
शीर्ष अदालत ने यूएई से तिरुवनंतपुरम तक राजनयिक सामान के जरिए सोने की तस्करी से संबंधित विवादास्पद मामले में 12 आरोपियों को मिली जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया लेकिन इन सभी 12 आरोपियों को नोटिस जारी किया। पीठ ने पाया कि सभी आरोपी सरकारी कर्मचारी हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को राजस्थान और केरल हाईकोर्ट के फैसले से उत्पन्न भ्रम की ओर इशारा किया। दोनों हाईकोर्ट का निष्कर्ष बिल्कुल विपरीत हैं।
जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पकड़ा था तस्कर
पिछले साल फरवरी में केरल हाईकोर्ट ने 12 आरोपियों को जमानत देते हुए कहा था कि सोने की तस्करी आतंकवाद के दायरे में नहीं आती है। वहीं इसके विपरीत राजस्थान हाईकोर्ट ने फरवरी में फैसला सुनाया था कि सोने के तस्कर पर भी यूएपीए के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। हाईकोर्ट ने यह कहते हुए यूएपीए के तहत एनआईए द्वारा दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया था। इस मामले में मोहम्मद असलम को जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर 1.5 किलोग्राम से अधिक सोने की तस्करी के आरोप में पकड़ा गया था।