याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने एसआर बोम्मई बनाम भारत सरकार के मामले में संघवाद को संविधान के मूल ढांचे का एक हिस्सा माना है। इस प्रकार, संघवाद के सिद्धांत को न तो बदला जाना है और न ही संविधान के अनुच्छेद 13 के तहत परिभाषित कानूनों सहित राज्य की किसी भी कार्रवाई से प्रभावित होना है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का दायरा बढ़ाने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव व जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया और याचिकाकर्ता को इस मामले में बीएसएफ महानिदेशक को तत्काल वादी बनाने का निर्देश दिया। पीठ अब 14 दिसंबर को सुनवाई करेगी।
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वकील सायन बनर्जी द्वारा गुरुवार को दाखिल की गई जनहित याचिका में सीमा सुरक्षा बल अधिनियम, 1968 (बीएसएफ अधिनियम) की धारा 139 (1) को चुनौती दी गई है कि यह केंद्र सरकार को क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र तय करने के लिए बेलगाम, अप्रतिबंधित और मनमानी शक्तियां प्रदान करता है। इसमें कहा गया कि बीएसएफ अधिनियम की धारा 139 (1) केंद्र सरकार की शक्ति देश के संघीय ढांचे पर बल के अधिकार क्षेत्र को तय करने के लिए है। अधिनियम की धारा 139 बल के सदस्यों को प्रदत्त और अधिरोपित करने योग्य शक्तियों और कर्तव्यों से संबंधित है।
याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने एसआर बोम्मई बनाम भारत सरकार के मामले में संघवाद को संविधान के मूल ढांचे का एक हिस्सा माना है। इस प्रकार, संघवाद के सिद्धांत को न तो बदला जाना है और न ही संविधान के अनुच्छेद 13 के तहत परिभाषित कानूनों सहित राज्य की किसी भी कार्रवाई से प्रभावित होना है।