दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन में सैनिकों को आवश्यक कपड़ों, बर्फ के चश्मों और पर्याप्त राशन की कमी से जूझना पड़ा। इसका कारण यूपीए-2 सरकार के दौरान खरीद प्रक्रिया में देरी रही। इस दौरान बर्फ के चश्मों की 98 फीसदी कमी रही, वहीं सैनिकों को जरूरत के मुताबिक हाई कैलोरी वाला राशन भी नहीं मिल सका। इसकी 82 फीसदी कमी रही।
सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कैग रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए इसे पुराना बताया है। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट वर्ष 2015-16 की है न कि मौजूदा समय की। यह थोड़ी सी पुरानी है। सेना प्रमुख ने आगे कहा, 'मैं आपको सुनिश्चित करना चाहता हूं कि वर्तमान में हम पूरी तरह से तैयार हैं। हम इस पूरी तरह से सुनिश्चित कर रहे हैं कि जवानों की सभी जरूरतें पूरी हों।'
संसद में सोमवार को पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सियाचिन, लद्दाख और दोकलम जैसे ऊंचे क्षेत्रों में सैनिकों को उपयुक्त कपड़े, उपकरण व विशेष राशन मुहैया कराए जाने की जरूरत है ताकि अत्यधिक ठंड में उन्हें खराब मौसम व बीमारियों का सामना करने में सक्षम बनाया जा सके। सीएजी ने 2015-2016 से 2017-18 की अपनी रिपोर्ट में पाया कि कपड़ों व उपकरणों की खरीद में चार साल की देरी हुई, जिससे सैनिकों को इसकी गंभीर कमी से जूझना पड़ा। इसके चलते बर्फ के चश्मों की कमी 62 फीसदी से बढ़कर 98 फीसदी हो गई। इतना ही नहीं, सैनिकों को नवंबर 2015 से सितंबर 2016 के बीच मल्टी पर्पज बूट जारी नहीं किए।
रिपोर्ट में एक केस के हवाले से कहा गया, 1,16732 कैंप मेट्रेस (गद्दे) की जरूरत थी और कंपनी को जून, 2013 में ऑर्डर दिया गया। हालांकि कंपनी ने एक भी मेट्रेस की आपूर्ति नहीं की। इतना ही नहीं, गैर आपूर्ति के कारण कंपनी का ऑर्डर रद्द भी नहीं किया गया। इसी तरह, देहरादून की ऑर्डिनेंस फैक्टरी को दिसंबर 2010 और मई 2016 में 9,61,605 चश्मों का ऑर्डर दिया गया था, लेकिन एक भी चश्मे की आपूर्ति नहीं की गई।
राशन की कैलोरी में भी समझौता
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊंचे क्षेत्रों में सैनिकों के लिए राशन का विशेष स्केल उनकी दैनिक ऊर्जा को ध्यान में रखकर तय किया जाता है। हालांकि मूल मदों (बेसिक आइटम) के बदले वैकल्पिक मदों (सब्सिट्यूट) को सीमित प्रतिशत और ‘लागत के आधार’ पर भी अधिकृत किया गया था। बेसिक आइटम की जगह पर महंगे विकल्पों को समान कीमत पर मंजूरी देने की वजह से सैन्य दलों को दी जाने वाली कैलरी की मात्रा से समझौता किया गया।
स्वास्थ्य पर सीधा असर, भूख घटी, वजन घटा
मास्क, जैकेट, स्लीपिंग बैग भी पुराने निर्देशों पर खरीदे गए, जिससे सैनिक बेहतर उत्पाद इस्तेमाल नहीं कर सके। खरीद प्रक्रियाओं में देरी से उनके स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा। विभिन्न शारीरिक चुनौतियों के चलते उनकी भूख कम हो गई और उनका वजन भी कम हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक, जरूरतों का सही आकलन किए बिना ही सालाना योजनाएं बनाई जा रही हैं। काम पूरा होने में तय समय सीमा से बहुत ज्यादा देरी हो रही है।