केंद्र में नरेंद्र मोदी के सरकार के गठन के बाद अब बजट की तैयारियां जोर-शोर के साथ शुरू हो गईं हैं। लोकसभा चुनाव से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना अंतरिम बजट पेश किया था। लेकिन अब वे जुलाई में पूर्ण बजट पेश करने जा रही है। इसी सिलसिले में वित्त मंत्री अलग-अलग सेक्टर के लोगों के साथ प्री-बजट बैठकें कर रही हैं। इसी सिलसिले में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2024-25 पर सुझाव लेने के लिए नई दिल्ली में शनिवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों के साथ बजट पूर्व परामर्श बैठक की अध्यक्षता की। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों से आगामी बजट को लेकर सुझाव मांगे गए।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई इस बैठक में अधिकांश राज्यों के वित्त मंत्रियों ने केंद्र सरकार की 'पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना' की सराहना की। कई वित्त मंत्रियों ने केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण से इस योजना में और सुधार के लिए कुछ सुझाव भी दिए। बैठक में राज्यों के वित्त मंत्रियों ने अपने अपने राज्य की मांग को ध्यान रखते हुए विशेष डिमांड भी की। राज्यों के वित्त मंत्रियों ने राज्यों के विकास को और तेज करने के लिए बजट के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी कई सुझाव भी दिए।
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से ज्यादातर लोन बिना किसी शर्त के राज्यों को मुहैया कराए जाते हैं। मगर, इनका एक हिस्सा राज्यों द्वारा लोगों के जीवन में सुधार और सेक्टर आधारित प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने की शर्त से जुड़ा हुआ है। उन्होंने राज्यों से अपील की कि गाइडलाइंस का पालन करते हुए इन लोन का लाभ उठाएं। वित्त मंत्री ने सभी प्रतिनिधियों को उनके इनपुट और सुझावों के लिए धन्यवाद दिया। उन्हें केंद्रीय बजट 2024-25 की तैयारी के दौरान केंद्र सरकार द्वारा उचित विचार का आश्वासन दिया।
वित्तमंत्री ने राज्यों के वित्तमंत्री से कहा, केंद्र सरकार राज्यों के विकास को बढ़ावा देने के लिए हर तरह से सहयोग करने को तैयार है। इसमें समय पर टैक्स का बंटवारा, फाइनेंस कमीशन की ग्रांट और जीएसटी एरियर के भुगतान जैसे विषय शामिल हैं। पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना के माध्यम से हर राज्य के विकास को गति दी जाएगी।
इस बैठक में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, गोवा, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम के मुख्यमंत्री, बिहार, मध्यप्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री, राज्य के वित्त मंत्री और अन्य मंत्री शामिल हुए। इसके अलावा कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (विधानमंडल के साथ) एवं केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी इस बैठक में उपस्थित रहे।