सरकार ने किफायती आवास योजना के लिए राज्य सरकारों के साथ काम करने का फैसला किया है, ताकि इस योजना के लिए भूमि अधिग्रहण और निर्माण संबंधी मंजूरी मिलने के लिए लगने वाले समय को कम किया जा सके। मध्यस्थता लागत में कमी लाने और आसानी से पूंजी जुटाने के लिए सरकार ने वित्तीय क्षेत्र के नियामकों के साथ काम करने का फैसला किया है।
पीएम आवास पर खर्च
पीएम आवास योजना ग्रामीण पर अब तक 1,97,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसमें केंद्र सरकार ने 1,44,162 करोड़ रुपये वहन किए हैं। मोदी कैबिनेट द्वारा पीएम आवास योजना की अवधि बढ़ा दी गई है और इसके लिए 2,17,257 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी दी गई है, इसमें केंद्र सरकार का कुल खर्च करीब 1,44,000 करोड़ रुपये होगा।
नवंबर 2021 तक 1.65 करोड़ घर दिए जा चुके हैं
सरकार का अनुमान था कि देश में दो करोड़ 95 लाख लोगों को पक्का मकान देने की जरूरत है। साल 2021 नवंबर तक एक करोड़ 65 लाख आवास बना कर दिए जा चुके हैं। सभी गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के हिसाब से सरकार ने पीएम आवास योजना की अवधि साल 2024 तक बढ़ा दी है।
जून 2015 में शुरू प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य 2022 तक सभी के लिए आवास उपलब्ध कराना है। सरकार ने 2015 से 2022 तक देश में शहरी क्षेत्रों में 1.12 करोड़ मकानों के निर्माण का लक्ष्य रखा है।