बीएसएफ की 08 बटालियन में हुई बैठक में जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई, उनमें सीमा क्षेत्रों में ऊंची-ऊंची फसलों का प्रबंधन, सीमा के पास नागरिकों द्वारा जूट डंपिंग की समस्या, कर्फ्यू के बाद सीमा सड़कों पर नागरिक आवाजाही और बिना बाड़ वाले क्षेत्रों में बाड़ लगाने के लिए भूमि अधिग्रहण शामिल थे।
पड़ोसी देश बांग्लादेश में चल रहे तनाव के बीच मंगलवार को नदिया जिले में बीएसएफ दक्षिण बंगाल सीमांत की 8वीं बटालियन और 107वीं बटालियन के अधिकारीयों ने पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारीयों और सीमावर्ती गांवो के लोगो के साथ एक समंवय बैठक की। इसका उद्देश्य सीमावर्ती समुदायों और स्थानीय अधिकारीयों के साथ समन्वय स्थापित करना था।
विज्ञापन
इसी सिलसिले में पहली बैठक सीमा चौकी बोर्नबेरिया, 8वीं बटालियन बीएसएफ के जवानों ने पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई, जिनमें रणघाट के एसडीओ और एसडीएम, हंसखली के बीडीओ, डीएसपी (सीमा) पश्चिम बंगाल, बीएल और एलआरओ के अधिकारी, हंसखली के सहायक कृषि निदेशक और हंसखली गांव के सभापति/सरपंच, पंचायत के सदस्य शामिल हुए।
जानकारी के मुताबिक, बीएसएफ की 08 बटालियन में हुई बैठक में जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई, उनमें सीमा क्षेत्रों में ऊंची-ऊंची फसलों का प्रबंधन, सीमा के पास नागरिकों द्वारा जूट डंपिंग की समस्या, कर्फ्यू के बाद सीमा सड़कों पर नागरिक आवाजाही और बिना बाड़ वाले क्षेत्रों में बाड़ लगाने के लिए भूमि अधिग्रहण शामिल थे। बैठक में सीमा सुरक्षा और सामुदायिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए इन मुद्दों को संबोधित करने के महत्व पर जोर दिया गया।
विज्ञापन
इसके अलावा 107 बटालियन बीएसएफ की सीमा चौकियों उत्तरपारा और मुस्तफापुर में स्थानीय ग्रामीणों के साथ सीमा समन्वय बैठकें आयोजित की गईं। चर्चा बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और बांग्लादेशी सेना के कार्यभार संभालने के बाद मौजूदा स्थिति पर केंद्रित थी। बीएसएफ ने घुसपैठ और तस्करी की गतिविधियों को रोकने के लिए सतर्कता की आवश्यकता पर बल दिया। ग्रामीणों को सीमावर्ती क्षेत्रों और अंतरराष्ट्रीय सीमा सड़क (आईबीबीआर) पर रात के समय स्वतंत्र रूप से आवाजाही न करने की सलाह दी गई।
यह भी निर्णय लिया गया कि बाजार की सभी दुकानें नौ बजे तक बंद हो जानी चाहिए और मस्जिदों से घोषणा की जाएगी कि ग्रामीणों को सीमावर्ती क्षेत्रों से दूर रहना चाहिए। किसानों को निर्देश दिया गया कि वे केवल आवश्यक कार्य के लिए ही गेट का उपयोग करें और उन्हें जरूरत पड़ने पर बीएसएफ से तत्काल सहायता का आश्वासन दिया गया। बीएसएफ ने बल और स्थानीय नागरिक आबादी के बीच अच्छे संबंध बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया, समुदाय की सुरक्षा और सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।