तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) विधायकों की खरीद-फरोख्त का मामला अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। वहीं अब बीआरएस विधायक पायलट रोहित रेड्डी ने बुधवार को कहा कि विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले को सीबीआई को स्थानांतरित करने के तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश को पार्टी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।
रोहित रेड्डी ने कहा कि बुधवार को विधायकों की खरीद-फरोख्त का मामले की जांच उच्च न्यायालय ने एसआईटी से सीबीआई को स्थानांतरित कर दी। अभियुक्तों ने अपनी अपील में एक विशेष जांच दल जांच या सीबीआई जांच के लिए कहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें ईडी द्वारा उस मामले में बुलाया गया था जिसमें उनसे केवल व्यक्तिगत विवरण मांगा गया था और मामले से संबंधित कुछ भी नहीं था।
आगे रेड्डी ने कहा कि यदि आप देखें कि विधायक अवैध शिकार मामले के इस पूरे प्रकरण में वास्तव में क्या हो रहा था। जब ईडी ने मुझे उनके सामने पेश होने के लिए बुलाया, तो यह विशुद्ध रूप से मुझसे मेरा व्यक्तिगत विवरण, मेरे परिवार का विवरण, मेरे व्यावसायिक मामले और मेरे से संबंधित विवरण मांग जा रहा था। किसी भी अपराध या मनी लॉन्ड्रिंग मामले के बारे में कुछ भी उल्लेख नहीं किया गया था। लेकिन कानून का पालन करने वाले नागरिक के रूप में, मैंने सहयोग किया। यहां तक कि यह नहीं जानते कि यह जांच किस बारे में है, मैं उनके पास गया और जांच में सहयोग किया।
क्या है पूरा मामला
बीआरएस के विधायकों में से एक पी रोहित रेड्डी की शिकायत के आधार पर 26 अक्टूबर की रात में रामचंद्र भारती उर्फ सतीश शर्मा, नंद कुमार और सिम्हाजी स्वामी के खिलाफ संबंधित धाराओं- आपराधिक साजिश, रिश्वत की पेशकश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत मामले दर्ज किए गए थे। प्राथमिकी के मुताबिक, रोहित रेड्डी ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उन्हें 100 करोड़ रुपये की पेशकश की। इसके बदले में उसने शर्त रखी थी कि उन्हें टीआरएस छोड़कर भाजपा में शामिल होना पड़ेगा।
विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले में तीन आरोपियों को किया गया था गिरफ्तार
बता दें कि बीआरएस विधायकों में से एक पायलट रोहित रेड्डी की शिकायत के आधार पर, 26 अक्तूबर की रात को तीन आरोपियों- रामचंद्र भारती, कोरे नंद कुमार और सिम्हायाजी स्वामी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए थे। केसीआर की पार्टी के विधायकों ने आरोप लगाया था कि हमें दल बदलने के लिए रिश्वत देने का प्रयास किया गया।