इस चुनाव में कांग्रेस के करीब 36 बागी और भाजपा के करीब 33 नेता बागी होकर चुनाव मैदान में हैं। ये नेता या तो किसी छोटे दल के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं, या निर्दलीय ही ताल ठोंक रहे हैं। मजबूत पृष्ठभूमि के कई बागी अपने दलों का खेल बिगाड़ने की स्थिति में भी हैं। ऐसे में ज्यादातर सीटों की लड़ाई जो कभी भाजपा कांग्रेस के बीच आमने-सामने की लड़ाई थी, अब कई सीटों पर त्रिकोणीय हो गई है। ऐसे में बागी किसे नुकसान पहुंचाएंगे, यह तय करेगा कि आठ अक्टूबर को हरियाणा की सत्ता किसके पास रहेगी?
गुरुग्राम में निर्दलीय भारी
दिल्ली से सटी सीट गुरुग्राम हरियाणा की सबसे प्रतिष्ठित सीटों में गिनी जाती है। इस बार के चुनाव में यहां से भाजपा के मुकेश शर्मा और कांग्रेस के मोहित ग्रोवर के बीच लड़ाई है। लेकिन भाजपा से बगावत करके चुनावी रण में उतरे नवीन गोयल ने पूरे मुकाबले को रोचक बना दिया है। गुरुग्राम में ब्राह्मणों की अच्छी खासी आबादी रहती है। इनकी आबादी लगभग पचास हजार के करीब मानी जाती है। माना जाता है कि इसे देखते हुए ही भाजपा ने मुकेश शर्मा पर दांव लगाया है। वैश्यों के समर्थन से यह सीट भाजपा की मजबूत गढ़ बनकर उभरी है, लेकिन वैश्य समुदाय से ही आने वाले नवीन गोयल के मैदान में उतरने से भाजपा का गणित गड़बड़ा गया है।
वहीं, व्यवसाय की दुनिया में जबरदस्त पकड़ रखने वाले पंजाबी समुदाय की गुरुग्राम में एक लाख मतदाता हैं जिसे देखते हुए माना जा रहा है कि कांग्रेस के मोहित ग्रोवर भी मजबूत लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन इन दोनों परंपरागत दलों के सामने नवीन गोयल स्थानीय तौर पर मजबूत उम्मीदवार के रूप में लड़ाई लड़ रहे हैं जिससे पूरा समीकरण बदल गया है।चूंकि यहां पर पहले भी दो बार निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल कर रखी है, लिहाजा नवीन गोयल की दावेदारी को हल्के में नहीं माना जा रहा है। यही कारण है कि इस सीट पर तीनों प्रत्याशियों के बीच कड़ी जंग देखने को मिल रही है।
अन्य सीटों पर भी खेल बिगड़ा
गुरुग्राम की तरह कुरुक्षेत्र में भी भाजपा की सीट फंसी हुई है। यहां से भाजपा की बागी सावित्री जिंदल मैदान में हैं। वे बीजेपी सरकार के मंत्री कमल गुप्ता के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं। उद्योगपति परिवार की सावित्री जिंदल इस क्षेत्र में न केवल लोकप्रिय हैं, बल्कि इस पूरे क्षेत्र में उनके परिवार का जबरदस्त असर माना जाता है। लिहाजा यहां से भाजपा की दावेदारी पर ग्रहण लग गया है।