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बॉम्बे हाईकोर्ट: विदेशी अदालत नहीं कर सकती भारतीय दंपती के तलाक का फैसला

Mon, 21 Aug 2017 05:18 AM IST
एजेंसी, मुंबई
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bombay highcourt
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विदेशी अदालत भारतीय दंपती के वैवाहिक संबंध और तलाक के मामले में फैसला नहीं दे सकती। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि जिस भारतीय दंपती की शादी हिंदू विवाह अधिनियम से हुई हो और जो भारत का नागरिक है, उसके वैवाहिक मामलों पर फैसला देने का अधिकार विदेशी अदालत को नहीं है, चाहे दंपति उस समय विदेश में ही क्यों न रह रहा हो। 
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न्यायमूर्ति ए एस ओका और न्यायमूर्ति अनुजा प्रभुदेसाई की खंडपीठ ने पिछले सप्ताह दुबई की एक अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें वहां रह रहे एक भारतीय व्यक्ति की तलाक याचिका को मंजूरी दी गई थी।

संबंधित व्यक्ति की पत्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह निर्देश दिया। दुबई में तलाक याचिका मंजूर किए गए व्यक्ति की पत्नी ने मुंबई की एक पारिवारिक अदालत में अपने और दो बच्चों के गुजारा भत्ता के लिए याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था, कि इस मामले में दुबई की अदालत फैसला सुना चुकी है।
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पारिवारिक अदालत द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद इस महिला ने बांबे हाई कोर्ट में अपील की थी।  मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद उच्च न्यायालय ने कहा कि दोनों पक्ष (पति और पत्नी) भारतीय नागरिक हैं और पति के इस दावे का कोई पुख्ता दस्तावेज नहीं है कि वह दुबई के निवासी हैं।

पीठ ने कहा इन परिस्थितियों के तहत, दुबई की अदालत याचिकाकर्ता (पत्नी) और प्रतिवादी (पति) के बीच तलाक पर फैसला करने के लिए सक्षम नहीं है। न्यायालय ने कहा कि इस मामले में दोनों पक्ष भारतीय नागरिक हैं और जन्म से हिंदू हैं।

उन्होंने हिंदू वैदिक अधिकारों के अनुसार शादी की है और उनकी शादी और तलाक का मामला हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत आता है। अदालत ने दोनों पक्ष को पारिवारिक अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है, जहां 18 सितंबर को मामले की सुनवाई होगी। 
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