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बॉम्बे हाईकोर्ट: मेडिकल जांच में ‘पुरुष’ घोषित महिला को मिलेगी पुलिस विभाग में नौकरी, महाराष्ट्र सरकार को निर्देश 

Sat, 14 May 2022 10:05 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

दरअसल, पीठ 23 वर्षीय महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी के तहत नासिक ग्रामीण पुलिस भर्ती 2018 के लिए आवेदन किया था। उसने लिखित और शारीरिक परीक्षण उत्तीर्ण की। हालांकि, बाद में एक चिकित्सकीय जांच से पता चला कि उसके पास गर्भाशय और अंडाशय नहीं है। वहीं, एक दूसरी जांच से पता चला कि उसके पास पुरुष और महिला दोनों गुणसूत्र थे और इसमें कहा गया कि वह ‘पुरुष’ थी।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : file photo
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को उस महिला की राज्य पुलिस विभाग में नियुक्ति को दो महीने के भीतर अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है, जिसने संबंधित परीक्षा तो पास कर ली थी, लेकिन मेडिकल जांच में यह बात सामने आने के बाद कि वह एक ‘पुरुष’ है, अपनी नौकरी गंवा दी। 

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जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस माधव जामदार की पीठ ने यह फैसला पिछले हफ्ते उस वक्त सुनाया, जब राज्य के महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने अदालत को अवगत कराया कि राज्य सरकार ने वर्तमान मामले में सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण रखने और महिला को पुलिस विभाग में नियुक्त करने का फैसला किया है, लेकिन ‘कांस्टेबल से इतर पद’ पर। 

कुंभकोनी ने कहा कि विशेष आईजी (नासिक) महिला की योग्यता को ध्यान में रखते हुए राज्य के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को एक सिफारिश सौंपेंगे। उन्होंने पीठ को बताया कि याचिकाकर्ता महिला के लिए रोजगार की शर्तें और लाभ उसके स्तर के अन्य कर्मचारियों के समान होंगे, जिन्हें मानक प्रक्रिया के तहत भर्ती किया जाता है। 
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दरअसल, पीठ 23 वर्षीय महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी के तहत नासिक ग्रामीण पुलिस भर्ती 2018 के लिए आवेदन किया था। उसने लिखित और शारीरिक परीक्षण उत्तीर्ण की। हालांकि, बाद में एक चिकित्सकीय जांच से पता चला कि उसके पास गर्भाशय और अंडाशय नहीं है। वहीं, एक दूसरी जांच से पता चला कि उसके पास पुरुष और महिला दोनों गुणसूत्र थे और इसमें कहा गया कि वह ‘पुरुष’ थी।
 
पीठ ने राज्य सरकार और पुलिस महकमे को दी दो माह की मोहलत 
पीठ ने राज्य की ओर से कही गई बात स्वीकार कर ली और उसके अनुरूप प्रक्रिया को पूरा करने के लिए राज्य सरकार और पुलिस विभाग को दो महीने का समय दिया। पीठ ने आदेश पारित करते हुए कहा, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मामला है। याचिकाकर्ता में कोई दोष नहीं निकाला जा सकता, क्योंकि उसने एक महिला के रूप में अपना करियर बनाया है।

अपने शरीर के बारे में इन तथ्यों की नहीं थी जानकारी: पीड़िता  
महिला ने अदालत से कहा कि उसे अपने शरीर के बारे में इन तथ्यों की जानकारी नहीं थी। उसने कहा कि वह जन्म से ही एक महिला के रूप में रह रही थी और उसके सभी शैक्षिक प्रमाणपत्र और व्यक्तिगत दस्तावेज एक महिला के नाम से पंजीकृत हैं। उसे केवल इसलिए भर्ती से वंचित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि ‘कार्योटाइपिंग क्रोमोसोम’ जांच ने उसे पुरुष घोषित कर दिया है। 

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