बॉम्बे हाईकोर्ट ने वानखेड़े के पिता ज्ञानदेव की ओर से दायर मानहानि के मुकदमे में महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े के परिवार के बारे में ट्वीट करने से महाराष्ट्र के मंत्री को रोकने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने मलिक और ज्ञानदेव के मौलिक अधिकारों में संतुलन को जरूरी बताया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक को तथ्यों के उचित सत्यापन के बाद वानखेड़े परिवार के खिलाफ कुछ भी टिप्पणी करनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि समीर वानखेड़े के खिलाफ मलिक के ट्वीट द्वेष से प्रेरित थे।
ट्विटर पर छिड़ी नई जंग
बीते कुछ दिनों से मलिक और वानखेड़े परिवार के बीच फिर से जंग शुरू हो गई है। दरअसल, 19 नवंबर को नवाब मलिक ने वानखेड़े के खिलाफ प्रेस कॉफ्रेंस की जानकारी दी तो समीर वानखेड़े की पत्नी क्रांति रेडकर ने उनके खिलाफ तंज कसा। इसके बाद नवाब मलिक के बेटी निलोफर ने भी उन्हें जवाब दिया। 20 नववंबर को क्रांति रेडकर की ओर से 1985 में स्कूल में जमा किया गया जन्म प्रमाण पत्र और नया बर्थ सर्टिफिकेट पोस्ट किया, जिसके जवाब में निलोफर ने ट्वीट किया।
सोमवार को भी किए ट्वीट
इससे पहले नवाब मलिक ने सोमवार को एक बार फिर से वानखेड़े को लेकर ट्वीट किया। उन्होंने एक फोटो शेयर कर दावा किया कि यह फोटो वानखेड़े के निकाह की है। उन्होंने फोटो के साथ कैप्शन दिया, 'निकाहनामे पर साइन करते हुए समीर दाऊद वानखेड़े की तस्वीर।' उन्होंने समीर वानखेड़े के निकाहनामे की फोटो भी शेयर की। एक अन्य ट्वीट में मलिक ने लिखा, 'कबूल है, कबूल है, कबूल है... यह क्या किया तूने समीर दाऊद वानखेड़े।'