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नांदेड़ अस्पताल में मौतें: बॉम्बे HC की सरकार को फटकार, पिछले छह महीनों में डॉक्टरों की भर्ती का ब्योरा मांगा

Fri, 06 Oct 2023 12:43 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

नांदेड़ के डॉ. शंकरराव चव्हाण सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 48 घंटे से भी कम समय में 31 मरीजों की मौत हो गई थी। जानकारी के अनुसार, कुल 31 मृतकों में से 16 शिशु हैं। 
 
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विस्तार
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नांदेड़ अस्पताल में हुई मौतों के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार ने फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि सरकार बताए उसने सरकारी अस्पतालों में खाली पदों को भरने के लिए क्या कुछ कदम उठाए। साथ ही चिकित्सा आपूर्ति के बारे में हलफनामा दायर करें। 

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यह है मामला
महाराष्ट्र में नांदेड़ के एक सरकारी अस्पताल में मरीजों की मौत का मामला और गंभीर होता जा रहा है। नांदेड़ के डॉ. शंकरराव चव्हाण सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 48 घंटे से भी कम समय में 31 मरीजों की मौत हो गई थी। सोमवार तक मरने वालों की संख्या 24 थी जबकि बाद में सात और मरीजों की मौत हो गई थी। जानकारी के अनुसार, कुल 31 मृतकों में से 16 शिशु हैं। 

बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की रिपोर्ट के बारे में बताया
नांदेड़ अस्पताल में हुई मौतों के मामले में महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट में एक रिपोर्ट पेश की। बता दें, मरीजों की मौतों से जुड़े मामले में महाराष्ट्र सरकार की तरफ से महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने दलीले पेश कीं। रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट ने बताया कि राज्य सरकार की रिपोर्ट में क्या कहा गया है।
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रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ मरीजों की जान इसलिए नहीं बचाई जा सकी थी, क्योंकि उन्हें निजी अस्पतालों ने बहुत देर से रेफर किया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सभी दवाएं और अन्य आपूर्तियां उपलब्ध थीं और प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज किया गया। राज्य सरकार ने चिकित्सा आयोग की रिपोर्ट की एक बात भी सामने रखी। 

सरकार की रिपोर्ट में कहा गया कि चिकित्सा आयोग के अनुसार, नांदेड़ मेडिकल कॉलेजों में अधिक जनशक्ति और एक नए एनआईसीयू की आवश्यकता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 97 पदों में से केवल 49 ही भरे हुए हैं।



हाईकोर्ट का आदेश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को पिछले छह महीनों में सरकारी अस्पतालों में रिक्तियों को भरने के लिए उठाए गए कदमों और पिछले छह महीनों में सरकारी अस्पतालों की मांग और आपूर्ति के बारे में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया हैं। इसके साथ ही अदालत ने मेडिकल प्रोक्योरमेंट अथॉरिटी से अपनी खरीद, नियुक्ति और उपलब्ध स्टाफ के लिए 2023 अधिनियम के अनुसार एक हलफनामा दाखिल करने को भी कहा।

बॉम्बे हाई कोर्ट का यह भी कहना है कि चिकित्सा शिक्षा के प्रधान सचिव द्वारा दायर हलफनामे में पिछले एक साल में चिकित्सा आपूर्ति के लिए नांदेड़ से जुड़े संस्थानों का विवरण भी देना चाहिए। साथ ही, सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव द्वारा अन्य अस्पतालों के लिए भी इसी तरह का विवरण प्रदान किया जा सकता है।

कठिन समय में सीएम कहां हैं?
अस्पताल में हुई मौतों के मामले पर पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को कहा कि कोविड-19 के दौरान वही डॉक्टर, डीन, नर्स और वार्ड बॉय वहां थे। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा की। ठाकरे ने कहा, 'मेरी जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र एकमात्र ऐसा राज्य था, जहां दूर-दराज के इलाकों में ड्रोन के जरिए दवाइयां पहुंचाई गई थीं। पिछले कुछ दिनों से ठाणे, छत्रपति संभाजी नगर, नागपुर और नांदेड़ से खबरें आ रही हैं और कुछ जगहों से अभी भी खबरें आ रही हैं।'

उन्होंने कहा कि इसका जिम्मेदार कौन है? इस कठिन समय में सीएम कहां हैं? ठाकरे ने कहा कि यह सीएम और डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी थी कि वे जाकर मौतों के पीछे का कारण जानते।

आखिर मौत की वजह क्या है? 
इससे पहले 24 मौतों की सूचना पर महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के निदेशक डॉ. दिलीप म्हैसेकर ने बताया था कि मरीज कुछ स्थानीय निजी अस्पतालों से यहां भेजे गए थे। इनमें से जान गंवाने वाले कुछ मरीज वयस्क थे, जिनकी विभिन्न कारणों से मौत हुई।

अस्पताल के डीन से मिली जानकारी का हवाला देते हुए म्हैसेकर ने कहा कि जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें से कुछ नवजात थे और कुछ गर्भवती महिलाएं थीं। अन्य 70 मरीजों की हालत गंभीर है। कुछ लोगों की मौत अज्ञात जहर संबंधी कारण से हुई है।

मधुमेह, लीवर और गुर्दे की समस्याओं से जूझ रहे थे मरीज
वहीं, मेडिकल कॉलेज नांदेड़ के डीन श्यामराव वाकोडे ने बताया था कि मृतक बच्चे अलग-अलग बीमारियों से पीड़ित थे। वयस्कों में 70-80 वर्ष की आयु के कुछ मरीज थे जिन्हें मधुमेह, लीवर और गुर्दे की समस्याएं थीं। मरीज आमतौर पर गंभीर स्थिति में यहां आते हैं। दवाओं या डॉक्टरों की कोई कमी नहीं थी।

अस्पताल प्रशासन पर क्या कहना है? 
मीडिया से बात करते हुए डीन डॉ. श्यामराव वकोडे ने बताया था कि सितंबर 30 से लेकर एक अक्तूबर के बीच पैदा हुए 12 बच्चों की मौत हुई है। नवजात बच्चों के मौत का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि ये सभी बच्चे 0-3 तीन दिन के थे और उनका वजन भी बहुत कम था। उन्होंने कहा था, 'बाल चिकित्सा विभाग में 142 भर्ती है, जिसमें से 42 की हालत गंभीर है। ऑक्सीजन से लेकर वेंटीलेटर तक सभी की सुविधाएं वहां दी गई है। ये मरीज पड़ोसी जिले हिंगोली, परभणी और वाशिम से आए हैं, वहीं कुछ तेलंगाना के भी मरीज यहां हैं।'

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