जानकारी के मुताबिक, उच्च न्यायालय ने माना कि ऐसी परिस्थितियों में शामिल भावनाओं को ध्यान में रखे बिना अपराध पर विचार नहीं किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि शख्स ने खुद पर नियंत्रण खो दिया और गुस्से में अपनी पत्नी पर हमला कर दिया। वह उसकी हत्या नहीं करना चाहता था। अदालत ने इस मामले को गैरइरादतन हत्या करार दिया और दोषी को आठ साल की सख्त सजा सुनाई।
बता दें कि अक्तूबर 2016 के दौरान इस्लामपुर की सत्र अदालत ने अंकुश चव्हाण को दोषी करार दिया था और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उस वक्त अदालत ने माना था कि अंकुश ने इरादतन अपनी पत्नी का कत्ल किया। इसके खिलाफ दोषी ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की थी। इस मामले में न्यायाधीश साधना जाधव और न्यायाधीश सारंग कोटवाल की खंडपीठ ने सुनवाई की।
अंकुश चव्हाण के वकील लोकेश जादे ने बहस के दौरान कहा कि महिला अपनी ससुराल छोड़कर चली गई थी और अपनी बहन के घर में रह रही थी। अंकुश अपनी पत्नी को वापस लाने के लिए साली के घर गया था, लेकिन महिला ने ससुराल लौटने से साफ इनकार कर दिया। गुस्से में अंकुश ने उस पर मूसल से वार कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।