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Chhath Puja 2021: क्या यह राजनीतिक एजेंडा का हिस्सा है, दिल्ली की राजनीति में इसका महत्व क्या?

प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Tue, 12 Oct 2021 05:56 PM IST

सार

भाजपा सांसद मनोज तिवारी सार्वजनिक स्थानों पर छठ पूजा करने के प्रतिबंध खिलाफ केजरीवाल के घर के सामने प्रदर्शन के दौरान चोट लगने से घायल हो गए हैं। उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। तिवारी ने सार्वजनिक स्थानों पर छठ पूजा कराने को लेकर पूर्वांचलियों की राय लेने के लिए एक 'रथ यात्रा' भी शुरू की थी।
 
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मनोज तिवारी और अरविंज केजरीवाल छठ घाट पर (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
छठ पूजा को लेकर दिल्ली में राजनीति गरमा गई है। कोरोना को देखते हुए दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों, जलाशयों और नदी किनारों पर छठ पूजा को लेकर रोक लगा दी है। दिल्ली सरकार के इस फैसले के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी सड़कों पर उतर आई है। इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता के नेतृत्व में सैंकड़ों कार्यकर्ता दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की घर की तरफ बढ़े।

प्रदर्शन करने वालों में भाजपा सांसद मनोज तिवारी भी शामिल थे जो इस मुद्दे पर सबसे ज्यादा मुखर हैं, वे घायल हो गए हैं।  छठ पूजा को लेकर इस बार भाजपा और आप आमने-सामने है। दोनों पार्टियों के बीच इस मु्द्दे को लेकर रस्साकशी तेज हो गई है। दिल्ली से कांग्रेस के पूर्व सांसद अरविंद केजरीवाल सरकार से अपील कर रहे हैं कि वह पूर्वांचलियों की भावनाओं को ठेस न पहुंचाएं। माना जा रहा है कि नगर निकाय चुनाव मुश्किल से छह महीने दूर हैं, इसलिए हर राजनीतिक दल में पूर्वांचली मतदाताओं को रिझाने की होड़ लगी है। 






27 सीटों पर पूर्वांचल मतदाताओं का प्रभाव
दिल्ली में छठ पूजा को लेकर राजनीति होना कोई नई बात नहीं है। दिल्ली में करीब 40 लाख पूर्वांचली (यूपी-बिहार के) मतदाता हैं जो छठ पूजा करते है। उन्हें साधने के लिए कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी में होड़ लगी रहती है। दिल्ली की 27 विधानसभा सीट ऐसी है जहां पूर्वांचल के लोग चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। इसी वजह से सियासी दल भी पूर्वांचल मतदाताओं पर जमकर दांव लगाते रहे हैं। 
 
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मनोज तिवारी और अरविंज केजरीवाल छठ घाट पर (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
छठ पूजा को लेकर दिल्ली में राजनीति गरमा गई है। कोरोना को देखते हुए दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों, जलाशयों और नदी किनारों पर छठ पूजा को लेकर रोक लगा दी है। दिल्ली सरकार के इस फैसले के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी सड़कों पर उतर आई है। इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता के नेतृत्व में सैंकड़ों कार्यकर्ता दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की घर की तरफ बढ़े।

प्रदर्शन करने वालों में भाजपा सांसद मनोज तिवारी भी शामिल थे जो इस मुद्दे पर सबसे ज्यादा मुखर हैं, वे घायल हो गए हैं।  छठ पूजा को लेकर इस बार भाजपा और आप आमने-सामने है। दोनों पार्टियों के बीच इस मु्द्दे को लेकर रस्साकशी तेज हो गई है। दिल्ली से कांग्रेस के पूर्व सांसद अरविंद केजरीवाल सरकार से अपील कर रहे हैं कि वह पूर्वांचलियों की भावनाओं को ठेस न पहुंचाएं। माना जा रहा है कि नगर निकाय चुनाव मुश्किल से छह महीने दूर हैं, इसलिए हर राजनीतिक दल में पूर्वांचली मतदाताओं को रिझाने की होड़ लगी है। 





27 सीटों पर पूर्वांचल मतदाताओं का प्रभाव
दिल्ली में छठ पूजा को लेकर राजनीति होना कोई नई बात नहीं है। दिल्ली में करीब 40 लाख पूर्वांचली (यूपी-बिहार के) मतदाता हैं जो छठ पूजा करते है। उन्हें साधने के लिए कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी में होड़ लगी रहती है। दिल्ली की 27 विधानसभा सीट ऐसी है जहां पूर्वांचल के लोग चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। इसी वजह से सियासी दल भी पूर्वांचल मतदाताओं पर जमकर दांव लगाते रहे हैं। 
 

छठ पूजा मनाते मनोज तिवारी - फोटो : अमर उजाला
पहले दिल्ली की सियासत में पंजाबी और वैश्य लॉबी का दबदबा रहा लेकिन अब पूर्वांचलियों के बढ़ते प्रभाव के कारण पार्टियों ने रणनीति बदली है। भाजपा और आम आदमी पार्टी ने अपने प्रदेश इकाई में कई पूर्वांचली चेहरे आगे किए। भाजपा, आप और कांग्रेस ने पूर्वांचलियों के लिए अलग प्रकोष्ठ और मोर्चे का गठन किया है। पूर्वांचली मतदाताओं को लुभाने के लिए भाजपा ने भोजपुरी स्टार मनोज तिवारी को 2016 में दिल्ली भाजपा प्रमुख  रूप में नियुक्त किया था।

दिल्ली विधानसभा में पूर्वांचल का दबदबा धीरे-धीरे बढ़ता रहा है। 1993 में पहली बार लाल बिहारी तिवारी, परवेज हाशमी और कीर्ति आजाद विधायक चुने गए थे। इसके बाद 1998 की विधानसभा में प्रवासियों की ठीक-ठाक संख्या रही।

कोरोना से पहले दिल्ली में आम आदमी पार्टी जहां छठ पूजा के लिए सार्वजनिक अवकाश की घोषणा करती रही है, वहीं भाजपा एक कदम आगे बढ़कर नदी तट पर परेशानी मुक्त अनुष्ठान के लिए एक अभियान चलाती रही है। हालांकि पिछले कुछ समय से इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी बढ़त लेते हुए दिखाई दे रही है।

आप की जीत में पूर्वांचली मतदाताओं का हाथ 
पिछले कुछ सालों में पूर्वांचली एक महत्वपूर्ण वोट बैंक के रूप में उभरे हैं। 2015 में आप की जीत में इस वोट बैंक का बहुत बड़ा हाथ माना जाता है। दिल्ली की राजनीति में आम आदमी पार्टी के उदय के बाद से राजधानी की राजनीति में पूर्वांचली क्षेत्र के मतदाता भी अहम होते चले गए हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल के लगभग एक दर्जन उम्मीदवार विजयी हुए थे और उस चुनाव में पार्टी ने 70 में से 67 सीटों पर जीत हासिल की थी। 

 

छठ पूजा - फोटो : amar ujala
इसलिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से लेकर उनके मंत्रिमंडल के अन्य मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता तक इस पूजा की व्यवस्था पर पैनी नजर बनाए रखते हैं। छठ घाटों को बनाने, घाटों की साफ-सफाई से लेकर, घाटों पर सभी सुविधाएं विकसित करने के लिए नौकरशाहों को खास निर्देश दिए जाते रहे हैं। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा जाने के कारण केजरीवाल सरकार इस बार सतर्कता बरत रही है और सार्वजनिक स्थानों पर छठ पूजा करने पर रोक लगा दी गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में आप के उभार से पहले ये मतदाता कांग्रेस के बड़े समर्थक माने जाते थे। लेकिन 2015 के विधानसभा चुनावों के बाद उनका रुझान आप की तरह होने लगा। माना जाता है कि इस चुनाव में आप को मिली शानदार जीत के पीछे पूर्वांचल वोट बैंक ने अहम भूमिका निभाई।

पूर्वांचलियों की हार-जीत में अहम भूमिका
सीएसडीएस के निदेशक संजय कुमार बताते हैं कि पूर्वांचली मतदाता दिल्ली चुनाव की हार-जीत में उनकी भूमिका बढ़ी है। दिल्ली में वर्तमान में करीब 35-37 फीसदी वोट बैंक इन पूर्वांचली मतदाताओं का है।  ये कई सीटों पर निर्णायक भूमिका में हैं। 2015 का चुनाव हो या 2020 का आम आदमी पार्टी की जीत में इनकी बड़ी भूमिका है।
 

मनोज तिवारी की जगह आदेश गुप्ता दिल्ली भाजपा अध्यक्ष बनाए गए (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
2015 के विधानसभा चुनाव में आप को 54.3 फीसदी वोट मिले थे। बीजेपी को 32.2 फीसदी वोट मिले, जबकि कांग्रेस के लिए यह आंकड़ा महज 9.7 फीसदी था। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी 62 सीटें जीत कर आम आदमी पार्टी ने सत्ता में वापसी की थी। इस चुनाव में पार्टी के करीब 54 फीसदी वोट शेयर थे।

भाजपा की छटपटाहट क्या? 
भाजपा दिल्ली की सत्ता से करीब 23  साल से बाहर है।  2020 के चुनाव में भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की थी लेकिन पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। पिछले साल हुए चुनाव में दिल्ली के 70 विधानसभा सीटों में से भाजपा को महज आठ सीटें हासिल हुई।

हालांकि इस चुनाव में भाजपा का 63 सीटों पर वोट शेयर बढ़ा और 20 सीटों पर भाजपा ने 2015 चुनाव की तुलना में 10 फीसदी से ज्यादा वोट शेयर हासिल किया लेकिन भाजपा जिस तरह केंद्र की मोदी सरकार की उपलब्धियों को लेकर चुनाव में उतरी थी नतीजे उस हिसाब से नहीं आए। लेकिन अगले साल एमसीडी चुनाव के कारण भाजपा ने पूर्वांचलियों पर डोरे डालने के मकसद से छठ पूजा को लेकर आप सरकार के फैसले का विरोध करना शुरू कर दिया है ताकि इस वर्ग पर थोड़ी-बहुत भी पकड़ बनाई जा सके।  




 

 

प्रदर्शन में मनोज तिवारी हुए घायल - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली में नए वोटर्स को नहीं खींच पाई भाजपा
संजय कुमार कहते हैं कि दिल्ली में छठ पूजा का बढ़ता महत्व राष्ट्रीय राजधानी में पूर्वांचली मतदाताओं के बढ़ते दबदबे का प्रतीक है और भाजपा इसी वोट बैंक पर नजर गड़ाए हुए है जिसे आम आदमी पार्टी को समर्थक माना जाने लगा है। पहले पूर्वांचली कांग्रेस को वोट करते रहे थे लेकिन अब वे आप की तरह खिसक गए हैं। पूर्वांचली मतदाता अभी तक भाजपा के लिए खुलकर सामने नहीं आए हैं। इसलिए भाजपा विधानसभा में 35-35 फीसदी वोट पर ठहरी हुई है। वे नए वोटर अपनी तरफ नहीं खींच पाए हैं। दिल्ली में अभी भी पारंपरिक वोटर्स ही भाजपा को वोट करते हैं। 

अगले साल के एमसीडी चुनाव पर नजर
वे मानते है कि जिस तरह केंद्र की मोदी सरकार के लिए विपक्ष में छटपटाहट है कैसे केंद्र को चुनौती दी जाए। इसी तरह दिल्ली में भाजपा में छटपटाहट है कि कैसे केजरीवाल को किनारे पर लगाकर दिल्ली में अपनी स्थिति मजबूत की जाए। पार्टी को 2020 में इतने खराब प्रर्दशन की उम्मीद नहीं थी। अगले साल एमसीडी के चुनाव को देखते हुए भाजपा चाहती हैं कि कोई तो उन्हें मौका मिले जिससे केजरीवाल को घेरा जा सके।

उनके मुताबिक यह सिर्फ हिंदुत्व कार्ड खेले जाने का  मामला नहीं है क्योंकि इसके जवाब में सॉफ्ट हिंदुत्व का कार्ड कई बार खेल चुकी है। सार्वजनिक स्थान पर छठ पूजा पर प्रतिबंध लगाने की बात को विपक्ष जैसे ही ज्यादा हवा देने की कोशिश करेगी केजरीवाल इसे लोगों की स्वास्थ्य से जोड़ कर जवाब दे देंगे। इसलिए उनका मानना है कि भाजपा को इससे कोई फायदा नहीं होने वाला है। 
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