तजिंदर पाल सिंह बग्गा को शुक्रवार सुबह उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया है। पंजाब पुलिस ने भाजपा नेता तजिंदरपाल सिंह बग्गा को उनके आपत्तिजनक ट्वीट के कारण गिरफ्तार किया है। उन पर आईटी एक्ट के तहत दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने के उद्देश्य से ट्वीट करने के आरोप लगाए गए हैं। बग्गा के अलावा पंजाब पुलिस ने भाजपा नेता नवीन कुमार जिंदल, कांग्रेस नेता अलका लांबा और कवि कुमार विश्वास के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। बड़ा प्रश्न है कि अरविंद केजरीवाल विपक्षी दलों के नेताओं की गिरफ्तारी कराकर क्या संदेश देना चाहते हैं?
माना जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल भाजपा और कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार करवाकर अपने समर्थकों तक विशेष संदेश पहुंचाना चाहते हैं। वे जनता में यह संदेश देना चाहते हैं कि वे हर मुद्दे पर केंद्र सरकार और भाजपा से लड़ने में सक्षम हैं। चूंकि, इसी बीच कांग्रेस के कई नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों ने छापेमारी कर बड़ी कार्रवाई की है, कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी को असम पुलिस के द्वारा फंसाया गया है, लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस ने कोई जोरदार विरोध नहीं किया है। इससे जनता में उसकी मजबूती को लेकर एक नकारात्मक संदेश गया है।
लेकिन चूंकि अरविंद केजरीवाल अब देश की विपक्षी राजनीति में कांग्रेस की जगह लेना चाहते हैं, वे भाजपा के खिलाफ पूरी मजबूती से लड़ते हुए दिखना चाहते हैं। इससे विपक्ष के नेता और पार्टी के तौर पर उन्हें मजबूती मिलेगी। माना जा रहा है कि वे जनता के बीच इस मनोवैज्ञानिक लड़ाई को जीतना चाहते हैं। इस प्रकार तजिंदर पाल सिंह बग्गा की गिरफ्तारी को केजरीवाल की राजनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, इसके पहले केंद्र सरकार की एजेंसियों ने आम आदमी पार्टी के कई शीर्ष नेताओं पर छापेमारी की है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ हाल ही में सीबीआई ने सबूतों के अभाव में केस बंद करने का फैसला किया है। इसके पहले अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के कार्यालयों-घरों पर भी छापे पड़ चुके हैं। चूंकि दिल्ली सरकार के पास दिल्ली पुलिस का अधिकार नहीं है, लिहाजा केजरीवाल इस बदले की राजनीति का उचित जवाब नहीं दे पाए।
लेकिन अब पंजाब के रूप में उनके पास एक पूर्ण राज्य हाथ में आ गया है, लिहाजा उसकी पुलिस का इस्तेमाल करते हुए अरविंद केजरीवाल भाजपा नेताओं को उसी अंदाज में गिरफ्तार कराने की रणनीति अपना रहे हैं, जिस तरह उनके खिलाफ एजेंसियों का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया था।
केंद्र सरकार की एजेंसियों के रडार पर विपक्षी दलों के कई नेता रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी को बार-बार ईडी के सामने पेश होकर गवाही देने के लिए कहा जा रहा है, तो महाराष्ट्र के नेता नवाब मलिक को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया है, तो यूपी में सपा नेताओं पर भी छापेमारी हुई है। केजरीवाल इस राजनीति का उसी तरीके से जवाब देने की कोशिश करते हुए दिखाई पड़ते हैं।
राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र-राज्य सरकारों पर लंबे समय से एजेंसियों के दुरुपयोग करने के आरोप लगते रहे हैं। इस मामले में किसी भी राजनीतिक दल की किसी भी सरकार को क्लीन चिट नहीं दी जा सकती। लेकिन यह अब जिस तरह सामने आ रहा है, वह बेहद खतरनाक हो गया है। यदि इसी तरह हर राज्य सरकार और केंद्र सरकार एक दूसरे के नेताओं को केवल ट्वीट करने या बयानबाजी करने के कारण जेल में डालने लगेगी, तो इससे पूरी राजनीतिक व्यवस्था ध्वस्त होने का खतरा पैदा हो गया है।
इससे जनता का पुलिस, न्याय व्यवस्था और अन्य संवैधानिक एजिंसियों पर से भरोसा उठ सकता है जो देश के लोकतंत्र के हिसाब से उचित नहीं होगा। सभी राजनीतिक दलों को इस पर मिल-बैठकर एक हल निकालना चाहिए।
भाजपा नेता संबित पात्रा ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल ने यह बेहद खतरनाक खेल खेला है। वे अपने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए पंजाब पुलिस का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस का यह दुरुपयोग अप्रत्याशित नहीं है, लेकिन केजरीवाल को यह समझ लेना चाहिए कि यह ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा है कि भाजपा अपने हर कार्यकर्ता के साथ खड़ी है और वे उनके लिए संघर्ष करेंगे।
भाजपा ने बग्गा की गिरफ्तारी पर आम आदमी पार्टी के कार्यालय पर प्रदर्शन करने का फैसला किया है। बग्गा के पिता ने उनकी गिरफ्तारी के समय उनके साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है। बग्गा के पिता की शिकायत पर बग्गा के अपहरण का मामला दिल्ली पुलिस ने दर्ज कर लिया है।